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मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

बशीर बद्र
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उर्दू शायरी की दुनिया के मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्य, कला और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे बशीर बद्र ने अपने शब्दों और शायरी के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उनकी शायरी की सबसे बड़ी खासियत उसकी सादगी और गहराई थी, जो सीधे आम लोगों के दिलों तक पहुंचती थी।

बशीर बद्र के निधन पर बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार Javed Akhtar ने भी गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उर्दू भाषा ने आज अपना एक अनमोल शायर खो दिया है। जावेद अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र की शायरी और उनका व्यक्तित्व हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेगा।

आम लोगों की भावनाओं को शब्द देते थे बशीर बद्र

डॉ. बशीर बद्र की शायरी में प्रेम, दर्द, रिश्ते, अकेलापन और जिंदगी की सच्चाइयों की झलक साफ दिखाई देती थी। उनकी रचनाएं इतनी सहज और भावनात्मक होती थीं कि हर वर्ग का व्यक्ति उनसे खुद को जोड़ पाता था। यही वजह रही कि उनके शेर सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सोशल मीडिया और आम बातचीत का भी हिस्सा बन गए।

उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं, जैसे – 
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।”

इसी तरह उनका एक और मशहूर शेर है – 
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।”
आज भी लोगों की भावनाओं को छू जाता है।

अयोध्या से लेकर उर्दू साहित्य के शिखर तक का सफर

डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीए, एमए और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में भी लंबा योगदान दिया। वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लेक्चरर रहे और बाद में मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग के प्रमुख के रूप में करीब 17 वर्षों तक कार्य किया।

उर्दू साहित्य में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अपनी लेखनी से न सिर्फ शायरी को नई पहचान दी, बल्कि उसे आम लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया। उनकी कविताएं और गजलें आज भी नई पीढ़ी के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

सोशल मीडिया पर उमड़ा श्रद्धांजलि का सैलाब

बशीर बद्र के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। साहित्य प्रेमी, शायर, कलाकार और आम लोग उनके मशहूर शेर साझा कर उन्हें याद कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि बशीर बद्र का जाना उर्दू अदब के लिए अपूरणीय क्षति है।

डॉ. बशीर बद्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी। उनकी रचनाएं साहित्य की दुनिया में हमेशा महकती रहेंगी।

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