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22 जून का इतिहास: जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बनाई थी फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी, स्वतंत्रता आंदोलन को दी नई दिशा

22 जून का इतिहास
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22 जून का इतिहास: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 22 जून 1939 का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक’ को एक स्वतंत्र राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया था। ये कदम केवल एक नई पार्टी के गठन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य देश के स्वतंत्रता आंदोलन को अधिक आक्रामक, क्रांतिकारी और समाजवादी दिशा देना था।

कांग्रेस से क्यों बढ़े मतभेद?

1938 में हरिपुरा अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन में उन्होंने महात्मा गांधी के समर्थन प्राप्त उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर दूसरी बार कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया।

हालांकि, कांग्रेस के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं और महात्मा गांधी के साथ उनके वैचारिक मतभेद बढ़ते गए। नेताजी का मानना था कि अंग्रेजों के खिलाफ अधिक सख्त और निर्णायक रणनीति अपनाई जानी चाहिए, जबकि कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग अहिंसक और क्रमिक आंदोलन की नीति पर कायम था।

अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

कार्यसमिति के गठन को लेकर लगातार बढ़ते विवाद और सहयोग की कमी के कारण सुभाष चंद्र बोस ने 3 मई 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के भीतर मौजूद वामपंथी, समाजवादी और क्रांतिकारी विचारधारा वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने का फैसला किया।

कैसे हुई फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना?

इस्तीफे के कुछ समय बाद नेताजी ने ‘ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक’ की नींव रखी। इसके बाद 22 जून 1939 को नागपुर में आयोजित एक विशाल सम्मेलन में इसे औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र राजनीतिक दल का स्वरूप दिया गया।

फॉरवर्ड ब्लॉक का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा देना और समाजवादी विचारधारा के साथ एक मजबूत राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा करना था। नेताजी चाहते थे कि देश के सभी प्रगतिशील और क्रांतिकारी विचारों वाले लोग एकजुट होकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करें।

क्या थे फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रमुख उद्देश्य?

  • देश को जल्द से जल्द ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना।
  • किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों को प्राथमिकता देना।
  • समाजवादी और राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करना।
  • स्वतंत्रता आंदोलन को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाना।
  • देश के युवाओं को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ना।

स्वतंत्रता आंदोलन पर पड़ा गहरा प्रभाव

फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लोकप्रियता और बढ़ी। बाद में उन्होंने आजाद हिंद फौज (INA) के गठन और ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ जैसे ऐतिहासिक नारे के जरिए स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

आज भी फॉरवर्ड ब्लॉक भारत की एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिलता है।

क्यों याद किया जाता है 22 जून?

22 जून केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस अध्याय की याद दिलाती है, जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी अलग विचारधारा और मजबूत नेतृत्व के दम पर देश को आजादी की लड़ाई में नई दिशा देने का प्रयास किया था।

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