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Sonam Wangchuk Health Update: 20 दिनों के अनशन में 9.5 किलो वजन घटा, जानिए कितनी वेट लॉस की स्थिति बन सकती है जानलेवा

Sonam Wangchuk Health Update
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Sonam Wangchuk Health Update: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की लंबी भूख हड़ताल के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे वांगचुक का वजन लगातार कम हो रहा है। 20वें दिन तक उनका कुल वजन लगभग 9.5 किलोग्राम घट चुका था, जिसके बाद उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में ही उनका वजन करीब 350 ग्राम कम हुआ और अब उनका वजन 56.55 किलोग्राम दर्ज किया गया है। ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लगातार वजन घटने से शरीर पर क्या असर पड़ता है और किस स्थिति में ये जानलेवा साबित हो सकता है।

सोनम वांगचुक की ताजा हेल्थ रिपोर्ट

मेडिकल टीम द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल उनके स्वास्थ्य संकेत इस प्रकार हैं –

  • वजन: 56.55 किलोग्राम
  • कुल वजन में कमी: लगभग 9.5 किलोग्राम
  • ब्लड प्रेशर: 108/68 mm Hg
  • ब्लड शुगर: 80 mg/dL
  • पल्स रेट: 72 प्रति मिनट
  • ऑक्सीजन सैचुरेशन: 96%
  • स्थिति: हल्का डिहाइड्रेशन, लेकिन मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार उपवास के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

लंबे समय तक भूखे रहने पर शरीर में क्या होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक भोजन नहीं करता, तो शरीर चरणबद्ध तरीके से अपनी ऊर्जा का उपयोग करना शुरू करता है।

पहला चरण: ग्लाइकोजन खत्म होता है

भोजन बंद होने के लगभग 24 से 48 घंटे के भीतर शरीर में लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन समाप्त होने लगता है। ये शरीर का सबसे आसान ऊर्जा स्रोत होता है।

दूसरा चरण: शरीर फैट जलाना शुरू करता है

ग्लाइकोजन खत्म होने के बाद शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा (Fat) को तोड़कर कीटोन (Ketones) बनाता है, जिससे कुछ समय तक शरीर काम करता रहता है।

तीसरा चरण: मांसपेशियां टूटने लगती हैं

जब फैट भी पर्याप्त नहीं बचता या शरीर को ग्लूकोज की जरूरत होती है, तब शरीर अपनी ही मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाना शुरू कर देता है। यही स्थिति सबसे अधिक खतरनाक मानी जाती है।

इस दौरान केवल हाथ-पैर की मांसपेशियां ही नहीं, बल्कि हृदय (Heart) की मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं। यदि ये प्रक्रिया अधिक समय तक जारी रहे तो हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और जान का खतरा बढ़ सकता है।

कितना वजन घटना माना जाता है खतरनाक?

चिकित्सकों के अनुसार, केवल वजन कम होना ही खतरे का संकेत नहीं है, बल्कि ये देखना जरूरी होता है कि –

  • वजन कितनी तेजी से घट रहा है।
  • वजन का कितना प्रतिशत कम हुआ है।
  • व्यक्ति को भोजन और पोषण कितना मिल रहा है।
  • शरीर के अन्य अंग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं या नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर का कुल वजन 40 से 50 प्रतिशत तक घट जाए, तो ये जीवन के लिए गंभीर खतरे की स्थिति मानी जाती है।

यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह भोजन छोड़ दे, तो सामान्य परिस्थितियों में 8 से 12 सप्ताह के भीतर शरीर गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है। हालांकि ये अवधि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, शरीर में मौजूद वसा, पानी और पोषण की स्थिति पर निर्भर करती है।

तेजी से वजन घटना भी हो सकता है खतरनाक

सिर्फ भूख हड़ताल ही नहीं, बल्कि किसी भी कारण से अचानक और तेजी से वजन कम होना भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा माना जाता है।

एक लंबे वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों का वजन बहुत कम समय में 10 किलोग्राम से अधिक घटा, उनमें किसी भी कारण से मृत्यु का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया।

इसी तरह तेजी से वजन बढ़ना भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर वजन घटाने या बढ़ाने दोनों ही स्थितियों में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवन के लिए वजन घटाना तभी लाभदायक है, जब वह संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के साथ धीरे-धीरे किया जाए।

डॉक्टरों की प्रमुख सलाह:

  • अचानक भोजन बंद न करें।
  • लंबे समय तक उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
  • पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें।
  • तेजी से वजन घटने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • हृदय रोग, मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग विशेष सावधानी बरतें।

सोनम वांगचुक की स्थिति पर बनी हुई है नजर

फिलहाल सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी हालत स्थिर है, लेकिन लगातार उपवास के कारण शरीर में पोषण, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पर विशेष नजर रखी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल या किसी भी कारण से तेजी से वजन घटना शरीर के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते चिकित्सकीय देखभाल और संतुलित पोषण बेहद जरूरी होता है।

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