महाराष्ट्र में बाघों का आतंक: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में बाघों के लगातार हमलों ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए खेती करना और मवेशियों को चराने ले जाना अब जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में बाघों ने हमला किया। इन घटनाओं में दो किसानों की मौत हो गई, जबकि एक चरवाहा गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में डर के साथ-साथ वन विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति सिंदेवाही तहसील की है, जहां पिछले आठ दिनों के भीतर बाघों के हमले में तीन लोगों की जान जा चुकी है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अब खेतों में जाने और जंगल के आसपास काम करने से भी डरने लगे हैं।
चिमूर में खेत में काम कर रहे किसान पर बाघ का हमला
बाघ के हमले की पहली घटना चंद्रपुर जिले की चिमूर तहसील के गरड़ापार गांव में हुई। यहां 55 वर्षीय किसान सदाशिव चिरकुटा खडसंग अपने खेत में काम कर रहे थे। शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे गदगांव वन क्षेत्र के कक्ष संख्या 380 में अचानक एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
हमला इतना अचानक और खतरनाक था कि किसान को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बाघ के हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए चिमूर ग्रामीण अस्पताल भेजा गया।
खेत में धान की फसल देखने गए बुजुर्ग किसान की मौत
दूसरी घटना सिंदेवाही तहसील के धुमनखेड़ा गांव की है। यहां 75 वर्षीय किसान पत्रु रामाजी मेश्राम शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे अपने खेत में धान की फसल देखने गए थे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वो घर नहीं लौटे तो परिवार के लोगों को चिंता हुई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की।
खोजबीन के दौरान खेत में उनका चश्मा, लाठी और चप्पल मिली। आसपास खून के निशान भी दिखाई दिए। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर तलाशी अभियान चलाया। काफी खोजबीन के बाद उनका क्षत-विक्षत शव गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास बरामद हुआ।
प्रारंभिक आशंका है कि खेत में मौजूद बाघ ने किसान पर हमला किया और उन्हें घसीटकर वहां तक ले गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिंदेवाही ग्रामीण अस्पताल भेज दिया गया।
इस घटना ने सिंदेवाही क्षेत्र में लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि पिछले आठ दिनों में इस इलाके में बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
मवेशी चराने गए चरवाहे पर भी बाघ का हमला
तीसरी घटना पोंभूर्णा तहसील के सातारा तुकूम जंगल क्षेत्र में हुई। यहां 60 वर्षीय चरवाहे राजेश्वर बिजा सिडाम अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल की ओर गए थे। इसी दौरान वन क्षेत्र के कक्ष संख्या 436 में छिपे बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
इस हमले में राजेश्वर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी और गोंडवाना आंदोलन से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे। घायल चरवाहे को तत्काल चंद्रपुर जिला सामान्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
चंद्रपुर में बढ़ता जा रहा है इंसान और बाघों के बीच संघर्ष
चंद्रपुर जिला अपने घने जंगलों और बाघों की अच्छी आबादी के लिए जाना जाता है। यहां जंगल से सटे कई गांवों में लोगों की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को फसलों की देखभाल के लिए खेतों में जाना पड़ता है, जबकि चरवाहों को मवेशियों के साथ जंगल के आसपास के इलाकों में जाना मजबूरी होती है।
लेकिन बाघों की बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही घटनाओं के कारण लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां भी डर के माहौल में कर रहे हैं।
वन विभाग के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
लगातार हो रहे हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। प्रभावित इलाकों में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने, गश्त बढ़ाने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
वन विभाग की ओर से कुछ प्रभावित क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाकर बाघों की गतिविधियों पर निगरानी की जा रही है। आसपास के गांवों के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल एक ही दिन में हुई तीन घटनाओं ने चंद्रपुर के ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल के आसपास रहने वाले किसान और चरवाहे अपनी रोजी-रोटी के लिए घर से निकलें तो आखिर अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें?
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