Digital Arrest Scam कैसे होता है?:“आपके नाम से पार्सल पकड़ा गया है…”, “आपका मोबाइल नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है…”, “आपके बैंक अकाउंट से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है…” अगर किसी अनजान नंबर से आपको ऐसी कॉल आए और सामने वाला खुद को पुलिस, CBI, RBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताए, तो सावधान हो जाइए।
इन दिनों साइबर अपराधियों का एक खतरनाक तरीका ‘Digital Arrest Scam’ के नाम से सामने आया है। इसमें ठग फोन या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को ये विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध में फंस गए हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल की एडवाइजरी के मुताबिक, ऐसे मामलों में अपराधी पुलिस, CBI, Narcotics Department, RBI, ED और Telecom Department जैसी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। कई मामलों में पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है।
Digital Arrest आखिर है क्या?
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि भारतीय कानून में ‘Digital Arrest’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
यानी कोई पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी आपको WhatsApp, Skype या किसी अन्य वीडियो कॉल पर रखकर ये नहीं कह सकती कि आप “Digital Arrest” में हैं।
असल में ये साइबर अपराधियों द्वारा बनाया गया एक डर और दबाव पैदा करने का तरीका है। ठग वीडियो कॉल के जरिए ऐसा माहौल बनाते हैं जैसे सामने बैठा व्यक्ति किसी पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय में है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है।
Digital Arrest Scam की शुरुआत कैसे होती है?
इस पूरे फ्रॉड को आमतौर पर कई चरणों में अंजाम दिया जाता है।
1. सबसे पहले आती है अचानक फोन कॉल
ठग किसी अनजान नंबर से कॉल करते हैं। कई बार वे खुद को Telecom Department, Police, CBI, RBI, ED या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं।
कॉल करने वाला बहुत गंभीर आवाज में बात करता है और शुरुआत में ही ऐसी जानकारी देता है जिससे सामने वाला घबरा जाए।
उदाहरण के लिए ठग कह सकता है –
“आपके नाम से एक पार्सल भेजा गया है जिसमें अवैध सामान मिला है।”
या –
“आपके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अपराध में हुआ है।”
सरकारी एडवाइजरी के अनुसार, अपराधी ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट, अवैध SIM कार्ड, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध में पीड़ित की कथित संलिप्तता का दावा कर सकते हैं।
2. फिर डर को और बढ़ाया जाता है
सिर्फ फोन कॉल से बात खत्म नहीं होती। ठग पीड़ित को बताते हैं कि मामला बहुत गंभीर है और अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कई बार वे किसी वरिष्ठ अधिकारी से बात कराने का दावा करते हैं। इसके बाद एक दूसरा व्यक्ति पुलिस अधिकारी, CBI अधिकारी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में बातचीत शुरू कर देता है। यहीं से एक फर्जी सरकारी जांच का माहौल तैयार किया जाता है।
3. Video Call पर ले जाते हैं
इसके बाद पीड़ित को WhatsApp या किसी अन्य वीडियो कॉल प्लेटफॉर्म पर आने के लिए कहा जाता है। ठग उसे लगातार कैमरा ऑन रखने और कॉल न काटने के लिए कहते हैं।
I4C की एडवाइजरी के अनुसार, कुछ मामलों में पीड़ितों को लंबे समय तक वीडियो कॉल पर रखा गया और उन्हें डिजिटल रूप से “confine” किया गया। अपराधी नकली पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय जैसा सेटअप भी तैयार कर सकते हैं ताकि पीड़ित को विश्वास हो जाए कि सामने वास्तविक अधिकारी मौजूद हैं।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर कैसे भरोसा जीतते हैं?
Digital Arrest Scam का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विश्वसनीय दिखने वाला फर्जी सबूत होता है। ठग आपको – फर्जी नोटिस, नकली FIR, फर्जी वारंट, सरकारी लोगो वाले दस्तावेज, फर्जी ID कार्ड, कोर्ट या जांच एजेंसी से जुड़े दिखने वाले कागजात दिखा सकते हैं।
हाल ही में मुंबई में सामने आए एक मामले में साइबर पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने 68 वर्षीय व्यक्ति को एक कथित बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने का दावा किया और फर्जी Supreme Court notice दिखाकर उसे वीडियो कॉल पर रखा। पुलिस के अनुसार, पीड़ित से ₹1.12 करोड़ की ठगी की गई। यानी ठग सिर्फ बोलकर डराने की कोशिश नहीं करते, बल्कि दस्तावेज और वीडियो सेटअप के जरिए अपनी कहानी को असली जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं।
4. इसके बाद आता है सबसे बड़ा हथियार – पैसों का डर
जब पीड़ित पूरी तरह डर जाता है, तब ठग पैसे की मांग शुरू करते हैं। उसे कहा जा सकता है कि “Verification के लिए अपने बैंक अकाउंट की रकम बताइए।” या “आपके खाते में मौजूद पैसे की जांच करनी है।”
कई बार ये भी कहा जाता है कि अगर पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया तो गिरफ्तारी हो सकती है। यही वो चरण होता है जहां साइबर अपराधी डर को सीधे आर्थिक नुकसान में बदल देते हैं।
5. पीड़ित को अकेला रखने की कोशिश
ऐसे मामलों में ठग पीड़ित को परिवार, दोस्तों या किसी अन्य व्यक्ति से बात करने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं। उन्हें लगातार कॉल पर रहने को कहा जाता है। इसका मकसद ये होता है कि पीड़ित को कुछ सोचने, जानकारी की पुष्टि करने या किसी दूसरे व्यक्ति से सलाह लेने का मौका न मिले। यानी पूरा फ्रॉड सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि डर, जल्दबाजी और मानसिक दबाव के जरिए भी चलाया जाता है।
ठग सरकारी अधिकारी जैसे कैसे लगते हैं?
Digital Arrest Scam में अपराधी कई स्तरों पर विश्वास पैदा करने की कोशिश करते हैं।
वे –
- सरकारी विभाग का नाम इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पुलिस जैसी वर्दी पहन सकते हैं।
- वीडियो कॉल पर नकली ऑफिस या पुलिस स्टेशन दिखा सकते हैं।
- सरकारी भाषा और कानूनी शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- अलग-अलग लोगों को अलग-अलग अधिकारी बनाकर सामने ला सकते हैं।
- फर्जी दस्तावेज दिखा सकते हैं।
सरकार ने भी चेतावनी दी है कि अपराधी नकली पुलिस स्टेशन और सरकारी कार्यालय जैसे सेटअप का इस्तेमाल करके लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे वास्तविक अधिकारी हैं।
Digital Arrest Scam में लोग फंसते क्यों हैं?
इस फ्रॉड की सबसे खतरनाक बात ये है कि ठग शुरुआत में पैसे की बात नहीं करते। वे पहले डर पैदा करते हैं और विश्वास बनाते हैं।
एक आम व्यक्ति के सामने अगर कोई खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कहे कि उसके खिलाफ गंभीर मामला है, तो वो घबरा सकता है। ठग इसी डर का फायदा उठाते हैं।
इसके अलावा – सरकारी एजेंसी का नाम + फर्जी दस्तावेज + वीडियो कॉल + गिरफ्तारी का डर + तुरंत कार्रवाई का दबाव। इन सभी चीजों को एक साथ इस्तेमाल करके पीड़ित को ये महसूस कराया जाता है कि उसके पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।
कैसे पहचानें कि ये Digital Arrest Scam है?
कुछ संकेत बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अगर कोई व्यक्ति –
1. फोन पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताए।
2. कहे कि आपके खिलाफ FIR या गिरफ्तारी का आदेश है।
3. वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करे।
4. किसी बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने को कहे।
5. OTP, PIN, Password या बैंकिंग जानकारी मांगे।
6. कहे कि किसी से बात करने पर मामला और बिगड़ जाएगा।
7. तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए।
तो बेहद सतर्क हो जाइए।
I4C स्पष्ट रूप से कहता है कि कानून में Digital Arrest की कोई अवधारणा नहीं है और वास्तविक कानून प्रवर्तन अधिकारी आपको डिजिटल तरीके से गिरफ्तार नहीं करते।
अगर ऐसी कॉल आए तो क्या करें?
सबसे जरूरी बात है – घबराएं नहीं। कॉल पर मौजूद व्यक्ति की बात को सच मानकर कोई पैसा ट्रांसफर न करें।
तुरंत ये काम करें:
- वीडियो कॉल काट दें।
- किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, Password या बैंक की जानकारी न दें।
- कोई पैसा ट्रांसफर न करें।
- कॉल करने वाले नंबर और WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- बैंक से जुड़ी जानकारी साझा हो गई है तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।
- अगर पैसे का फ्रॉड हो गया है तो तुरंत 1930 Cyber Crime Helpline पर शिकायत करें।
- National Cyber Crime Reporting Portal – cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करें।
अगर वित्तीय धोखाधड़ी हो चुकी है, तो शिकायत करते समय Transaction ID/UTR Number, बैंक या वॉलेट की जानकारी, ट्रांजैक्शन की तारीख और रकम जैसी जानकारी तैयार रखना उपयोगी होता है। साइबर क्राइम पोर्टल इन जानकारियों को शिकायत दर्ज करने के लिए मांगता है।
क्या Digital Arrest Scam सिर्फ बुजुर्गों को निशाना बनाता है?
ऐसा मानना सही नहीं होगा कि ये फ्रॉड केवल बुजुर्गों तक सीमित है। अलग-अलग उम्र के लोग इसके शिकार हो सकते हैं।
सितंबर 2026 में मुंबई साइबर पुलिस ने एक ऐसे मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें पुलिस के अनुसार 68 वर्षीय व्यक्ति से ₹1.12 करोड़ की ठगी की गई थी। जांच में कथित तौर पर कई बैंक खाते, SIM कार्ड और अन्य साधनों के इस्तेमाल की बात सामने आई।
ये मामला ये भी दिखाता है कि ऐसे फ्रॉड के पीछे कई बार एक संगठित नेटवर्क काम कर सकता है।
अगर आपने गलती से पैसे भेज दिए तो?
ऐसी स्थिति में शर्म या डर के कारण चुप न रहें। समय बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले अपने बैंक से संपर्क करें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी दें। इसके बाद 1930 पर तुरंत कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित एजेंसियों तक लेनदेन की जानकारी पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।
शिकायत के लिए बैंक स्टेटमेंट, Transaction ID/UTR, फोन नंबर, WhatsApp चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो, ईमेल या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखें। साइबर क्राइम पोर्टल भी शिकायत के साथ उपलब्ध डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने की सलाह देता है।
सबसे जरूरी बात फोन पर कोई आपको “Digital Arrest” नहीं कर सकता।
अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर रखने, गिरफ्तारी का डर दिखाने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो इसे गंभीर साइबर फ्रॉड का संकेत मानकर पहले स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि करें।
याद रखें – डर पैदा करना इस Scam का सबसे बड़ा हथियार है।
कॉल काटना, जानकारी साझा न करना, परिवार या विश्वसनीय व्यक्ति से बात करना और जरूरत पड़ने पर 1930 या cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत करना इस तरह के फ्रॉड से निपटने में अहम कदम हैं।
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