Digital Arrest Scam: साइबर अपराध के एक गंभीर मामले में मुंबई पुलिस की नॉर्थ साइबर पुलिस ने कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने 68 वर्षीय एक बुजुर्ग को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर करीब 1.12 करोड़ रुपये की ठगी की। गिरफ्तार आरोपियों में IIT दिल्ली से पढ़ा एक वेब डेवलपर और एक निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है।
कैसे शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल?
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर खुद को दूरसंचार विभाग, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क करते थे। उन्हें बताया गया कि उनके मोबाइल नंबर या सिम कार्ड का इस्तेमाल 238 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है।
इसके बाद आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित पर दबाव बनाया। कथित तौर पर उन्हें एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट नोटिस भी दिखाया गया और गिरफ्तारी का डर पैदा किया गया। इस दौरान पीड़ित को घर से बाहर नहीं निकलने और लगातार वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहने के लिए कहा गया।
1.12 करोड़ रुपये की कराई गई ट्रांसफर
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के दबाव में पीड़ित ने अपनी सावधि जमा (FD) तक तोड़ दी और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1,12,26,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित की बेटी को इस ठगी की जानकारी मिली और उसने साइबर पुलिस से संपर्क किया।
IIT ग्रेजुएट और बैंक मैनेजर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें IIT दिल्ली से ग्रेजुएट वेब डेवलपर गौरव महेश गोयल और एक निजी बैंक के ऑपरेशंस मैनेजर शिखर मुकेश त्यागी भी शामिल हैं।
अन्य गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश कुमार मोहनलाल जैन, मोहम्मद तारिक अनवर मोमिन, अजय कुमार कालीप्रसाद शर्मा और चिंतनकुमार सुरेशभाई देसाई के रूप में हुई है। पुलिस ने कथित तौर पर इनके पास से 20 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 25 बैंक खाते, ATM कार्ड, पासबुक और आधार कार्ड बरामद किए हैं।
बैंक खातों और सिम कार्ड के नेटवर्क का पता चला
पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि ठगी की रकम को अलग-अलग लोगों और कंपनियों के नाम पर मौजूद बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया। जांचकर्ताओं ने पैसों के ट्रेल का पीछा करते हुए उन खातों तक पहुंच बनाई जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने और आगे भेजने के लिए किया गया था।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
पुलिस ने लोगों को ऐसे साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने की सलाह दी है। ध्यान रखें:
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
- अजनबियों के वीडियो कॉल पर दिए गए निर्देशों पर तुरंत भरोसा न करें।
- डर या दबाव में आकर किसी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
- फर्जी नोटिस, पुलिस वर्दी, सरकारी लोगो या अधिकारी की पहचान देखकर तुरंत विश्वास न करें।
- संदिग्ध साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
मुंबई का ये मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी सरकारी अधिकारियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को मानसिक दबाव में डालने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय कॉल को तुरंत काटना, परिवार के लोगों को जानकारी देना और पुलिस या आधिकारिक साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना जरूरी है।






























