Moderna Cancer Therapy: कैंसर के इलाज की दिशा में एक अहम खबर सामने आई है। कोविड-19 के खिलाफ mRNA तकनीक वाली वैक्सीन के लिए चर्चित रही अमेरिकी कंपनी Moderna ने दवा कंपनी Merck के साथ मिलकर विकसित की जा रही एक पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर थेरेपी के फेज-3 ट्रायल में सकारात्मक नतीजे घोषित किए हैं।
ये थेरेपी मेलानोमा यानी गंभीर त्वचा कैंसर के मरीजों के लिए विकसित की जा रही है। खास बात ये है कि इसे हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं बनाया जाता, बल्कि मरीज के अपने ट्यूमर में मौजूद विशिष्ट जेनेटिक बदलावों के आधार पर तैयार किया जाता है। इसे फिलहाल Intismeran autogene (V940/mRNA-4157) के नाम से जाना जाता है।
Moderna और Merck के अनुसार, फेज-3 अध्ययन में इस थेरेपी को Keytruda (pembrolizumab) के साथ देने पर केवल Keytruda लेने की तुलना में कैंसर के दोबारा लौटने और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के जोखिम में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण कमी देखने को मिली। हालांकि, कंपनियों ने अभी विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं और लंबे समय के नतीजों समेत कई अहम जानकारियां आगे सामने आनी बाकी हैं।
क्यों चर्चा में है ये कैंसर थेरेपी?
इस थेरेपी की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्सनलाइज्ड यानी मरीज के हिसाब से तैयार होना है। सामान्य तौर पर किसी बीमारी के लिए एक ही दवा या वैक्सीन बड़ी संख्या में मरीजों को दी जा सकती है, लेकिन V940 का डिजाइन मरीज के ट्यूमर की खास पहचान के आधार पर किया जाता है।
मरीज के ट्यूमर की जांच करके उसमें मौजूद विशिष्ट म्यूटेशन की पहचान की जाती है। इसके बाद उन बदलावों से जुड़े नियोएंटीजन (Neoantigens) चुने जाते हैं, जिन्हें प्रतिरक्षा प्रणाली को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। V940 को अधिकतम 34 नियोएंटीजन को लक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यानी इसका उद्देश्य शरीर को ये समझने में मदद करना है कि मरीज के कैंसर की कोशिकाएं कैसी दिखती हैं, ताकि इम्यून सिस्टम उन्हें पहचानकर निशाना बना सके।
कैसे काम करती है mRNA कैंसर थेरेपी?
इसे आसान भाषा में समझें तो पहले मरीज के कैंसर ट्यूमर की जेनेटिक प्रोफाइल तैयार की जाती है। इसमें ऐसे म्यूटेशन खोजे जाते हैं जो सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
इसके बाद एक एल्गोरिदम इन बदलावों का विश्लेषण करता है और संभावित नियोएंटीजन चुने जाते हैं। इनकी जानकारी को mRNA के रूप में थेरेपी में शामिल किया जाता है।
शरीर में पहुंचने के बाद ये mRNA कोशिकाओं को इन चुने हुए कैंसर संकेतों से जुड़े प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देता है। इससे इम्यून सिस्टम की T-कोशिकाओं को कैंसर की विशिष्ट पहचान के खिलाफ प्रतिक्रिया विकसित करने में मदद मिल सकती है।
Keytruda के साथ क्यों दी जा रही है?
V940 को अकेले इस्तेमाल करने के बजाय इस अध्ययन में इसे Keytruda के साथ दिया गया है। Keytruda एक इम्यूनोथेरेपी है, जो PD-1 नामक प्रोटीन को ब्लॉक करके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करती है।
सरल शब्दों में, V940 का उद्देश्य इम्यून सिस्टम को कैंसर की खास पहचान उपलब्ध कराना है, जबकि Keytruda इम्यून सिस्टम की कैंसर से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसी संभावित संयोजन को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है।
फेज-3 ट्रायल में क्या सामने आया?
Moderna और Merck के नए फेज-3 नतीजों में V940 और Keytruda के संयोजन ने अध्ययन के प्रमुख लक्ष्य को हासिल किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, संयोजन लेने वाले मरीजों में केवल Keytruda लेने वालों की तुलना में कैंसर के दोबारा लौटने या फैलने से जुड़े परिणाम बेहतर रहे।
इससे पहले हुए फेज-2b अध्ययन के पांच साल के फॉलो-अप में भी V940 और Keytruda के संयोजन ने Keytruda अकेले की तुलना में कैंसर के दोबारा लौटने या मौत के जोखिम में 49% कमी दिखाई थी। दूर के हिस्सों में कैंसर फैलने या उससे संबंधित मौत के जोखिम में 59% कमी दर्ज की गई थी।
हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि शुरुआती और विस्तृत परिणामों में अंतर हो सकता है और नए फेज-3 अध्ययन के पूरे डेटा का विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन अभी बाकी है।
क्या ये कैंसर का इलाज पूरी तरह बदल देगी?
फिलहाल इसे कैंसर का अंतिम या सार्वभौमिक इलाज कहना सही नहीं होगा। ये एक जांचाधीन उपचार है और अभी नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना बाकी है।
विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों ने शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताया है, लेकिन इस थेरेपी की वास्तविक क्षमता समझने के लिए ओवरऑल सर्वाइवल, सुरक्षा, लंबे समय के परिणाम और बड़े पैमाने पर इसे तैयार करने की व्यवहारिकता जैसे सवालों के जवाब भी जरूरी होंगे।
कोविड के बाद mRNA तकनीक का अगला बड़ा इस्तेमाल?
mRNA तकनीक कोविड-19 वैक्सीन के कारण दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हुई थी। अब वैज्ञानिक इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कैंसर जैसी जटिल बीमारियों में करने की कोशिश कर रहे हैं।
V940 इस दिशा में खास इसलिए है क्योंकि इसका उद्देश्य किसी वायरस को पहचानने के बजाय मरीज के अपने कैंसर की विशिष्ट पहचान के खिलाफ इम्यून प्रतिक्रिया तैयार करना है।
Moderna और Merck इस तकनीक को सिर्फ मेलानोमा तक सीमित नहीं रखना चाहते। V940 को अन्य कैंसर, जिसमें नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर भी शामिल है, में भी क्लिनिकल ट्रायल के जरिए जांचा जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
पर्सनलाइज्ड कैंसर थेरेपी की सबसे बड़ी चुनौती इसका व्यक्तिगत और जटिल निर्माण है। हर मरीज के ट्यूमर में मौजूद जेनेटिक बदलाव अलग हो सकते हैं। ऐसे में ट्यूमर की जांच, म्यूटेशन की पहचान, उपयुक्त नियोएंटीजन का चयन और उसके आधार पर व्यक्तिगत थेरेपी तैयार करना एक जटिल प्रक्रिया है।
इसलिए अगर भविष्य में इसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है तो समय, लागत, उत्पादन क्षमता और मरीज तक सही समय पर व्यक्तिगत उपचार पहुंचाना महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
क्या मरीजों को अभी ये वैक्सीन मिल सकती है?
अभी इसे बाजार में उपलब्ध सामान्य कैंसर वैक्सीन या नियमित उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये एक investigational therapy है और इसके लिए क्लिनिकल ट्रायल तथा नियामकीय प्रक्रिया जारी है। INTerpath-001 फेज-3 अध्ययन में हाई-रिस्क मेलानोमा के उन मरीजों को शामिल किया गया है जिनका ट्यूमर सर्जरी से पूरी तरह निकाला जा चुका है।
इसलिए किसी भी मरीज को इस खबर के आधार पर अपना मौजूदा कैंसर उपचार बदलना या कोई उपचार खुद से शुरू नहीं करना चाहिए।
Moderna और Merck की पर्सनलाइज्ड mRNA थेरेपी के नए फेज-3 नतीजे कैंसर के इलाज में व्यक्तिगत इम्यूनोथेरेपी की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। खास तौर पर ये विचार महत्वपूर्ण है कि मरीज के कैंसर की जेनेटिक पहचान के आधार पर उसकी इम्यून प्रणाली को प्रशिक्षित किया जाए।
लेकिन इसे अभी ‘कैंसर की पक्की वैक्सीन’ या हर तरह के कैंसर का इलाज कहना जल्दबाजी होगी। फेज-3 के विस्तृत आंकड़े, लंबे समय के सर्वाइवल डेटा और नियामकीय मंजूरी के बाद ही ये स्पष्ट होगा कि ये तकनीक वास्तव में कैंसर के इलाज में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।
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