राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय को हटा दिया है। हालांकि, किताब के वितरण पर रोक लगाने के बावजूद 38 प्रतियां पहले ही बिक चुकी हैं, जिन्हें वापस लेना अब शिक्षा मंत्रालय के लिए चुनौती बन गया है।
2.25 लाख में से सिर्फ 38 कॉपियां बिकीं
जानकारी के अनुसार, इस पुस्तक की कुल 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं। इनमें से केवल 38 प्रतियां ही बाजार में बिक पाईं, जबकि 2,24,962 प्रतियां इन्वेंट्री में ही मौजूद रहीं।
NCERT ने सभी अवितरित प्रतियों को अपने वेयरहाउस में वापस मंगवा लिया है। साथ ही, जो 38 प्रतियां बिक चुकी हैं, उन्हें भी ढूंढकर वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।
24 फरवरी को जारी हुई थी नई किताब
‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम-II’ शीर्षक वाली यह पुस्तक 24 फरवरी को नए करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत जारी की गई थी। यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत पाठ्यपुस्तकों में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
क्या था विवाद?
विवादित सामग्री अध्याय 4 में शामिल थी, जिसका शीर्षक था – “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका”। इस अध्याय में न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार और लंबित मामलों (केस बैकलॉग) का उल्लेख किया गया था। इन संदर्भों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
आपत्तियों के बाद NCERT ने तुरंत पुस्तक के वितरण पर रोक लगा दी और पूरे अध्याय की समीक्षा का निर्णय लिया।
NCERT का आधिकारिक बयान
एनसीईआरटी (NCERT) ने अपने बयान में स्वीकार किया कि अध्याय में कुछ गलत पाठ और निर्णयों से संबंधित त्रुटियां अनजाने में शामिल हो गई थीं। परिषद ने स्पष्ट किया कि संबंधित अध्याय को हटाकर उसकी व्यापक समीक्षा और पुनर्लेखन किया जाएगा।
समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित संस्करण जारी किया जाएगा और उसी के अनुसार नई प्रतियां छापी जाएंगी।
शिक्षा मंत्रालय और NCERT फिलहाल बिकी हुई 38 प्रतियों को वापस लेने के प्रयास में जुटे हैं। इस घटनाक्रम ने पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की समीक्षा और प्रकाशन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, परिषद ने भरोसा दिलाया है कि संशोधित पाठ्यसामग्री को पूरी जांच-परख के बाद ही दोबारा जारी किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
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