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नासिक TCS केस: HR निदा खान की व्हाट्सऐप चैट से खुल सकते हैं कई राज, ब्रेनवॉश के आरोपों की जांच तेज

नासिक TCS केस
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नासिक TCS केस: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कैंपस से जुड़े एक संवेदनशील मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कंपनी की HR एग्जीक्यूटिव निदा खान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि उनके व्हाट्सऐप चैट से कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जिनसे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नासिक के TCS कैंपस में कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रभावित (ब्रेनवॉश) करने और उन्हें एक विशेष दिशा में प्रेरित करने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में HR अधिकारी निदा खान की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को टारगेट कर उनसे व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क किया जाता था और फिर धीरे-धीरे उनके विचारों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।

व्हाट्सऐप चैट बनी जांच का केंद्र

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर व्हाट्सऐप चैट सामने आई है। जांच एजेंसियां इन चैट्स की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि ये पता लगाया जा सके कि क्या वाकई कर्मचारियों को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, इन चैट्स में बातचीत के ऐसे संकेत मिले हैं जो ये दिखाते हैं कि एक खास पैटर्न के तहत लोगों से संपर्क किया जा रहा था।

अनोखी हायरिंग प्रक्रिया पर भी सवाल

इस मामले में TCS की कथित “यूनिक हायरिंग प्रोसेस” भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि भर्ती के दौरान कुछ विशेष लोगों को प्राथमिकता दी जा रही थी और बाद में उनके साथ अलग तरह से संवाद स्थापित किया जाता था। हालांकि, इस पूरे मामले में कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

जांच एजेंसियां अलर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। ये भी जांच की जा रही है कि क्या ये मामला किसी बड़े नेटवर्क या संगठित गतिविधि से जुड़ा है।

क्या हो सकता है आगे?

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, कॉर्पोरेट सेक्टर में इस तरह के मामलों को लेकर निगरानी और नियमों को और कड़ा किया जा सकता है।

नासिक का ये मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि ये कॉर्पोरेट माहौल में पारदर्शिता, नैतिकता और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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