महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। रूपाली चाकणकर (Rupali Chakankar) ने स्वयंभू ‘बाबा’ अशोक खरात के साथ कथित संबंधों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह मनगढ़ंत और मानहानिकारक बताया है।
सोशल मीडिया पर दी सफाई
रूपाली चाकणकर (Rupali Chakankar) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले 28 दिनों से उनके और उनके परिवार के खिलाफ निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनका उद्देश्य केवल उनकी छवि खराब करना है। चाकणकर के अनुसार, अब तक किसी भी आरोप लगाने वाले ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
महाराष्ट्राच्या राजकीय क्षेत्रात आजतागायत अनेकांवर आरोप झाले,त्या आरोपांचे पुरावे माध्यमांनी सबंध महाराष्ट्राला दाखवले व आरोप करणाऱ्यांनीही पुराव्यानिशी आरोप केले.मात्र आज 28 दिवस होत आहेत, माझ्यावर व माझ्या परिवारावर बेछूट व कपोलकल्पित आरोप हे फक्त हेतूपुरस्सर व बदनाम करण्यासाठी…
— Rupali Chakankar (@ChakankarSpeaks) April 14, 2026
अशोक खरात पर चल रही जांच
वहीं, अशोक खरात फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी समेत कई गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय है और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रहा है। ED द्वारा आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी भी की जा चुकी है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
पिछले महीने एक वीडियो सामने आया था, जिसमें रूपाली चाकणकर (Rupali Chakankar) कथित तौर पर अशोक खरात के पैर धोती नजर आई थीं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद और गहरा गया, जिसके चलते उन्हें महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा।
परिवार से भी पूछताछ
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पुलिस ने चाकणकर की बहन से भी पूछताछ की है। इसमें अशोक खरात द्वारा उनके बैंक खाते के कथित उपयोग की जांच की जा रही है। हालांकि, चाकणकर ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारा है।
गुमनाम पत्र पर उठाए सवाल
चाकणकर ने इस मामले में सामने आए एक गुमनाम पत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना किसी सत्यापन के इस पत्र को मीडिया में प्रसारित किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने ये भी पूछा कि ये पत्र आरोप लगाने वालों तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग हैं।
कानूनी वैधता पर भी उठे सवाल
चाकणकर ने बीड के पुलिस अधीक्षक नवनीत कंवट का हवाला देते हुए कहा कि बिना नाम और पते वाले गुमनाम पत्र की कानूनी मान्यता नहीं होती, इसलिए ऐसे दस्तावेजों को आधार बनाकर आरोप लगाना उचित नहीं है।
ये पूरा मामला फिलहाल जांच के अधीन है और कई एजेंसियां इसकी तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष ही ये तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल, ये विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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