ओणम 2025: भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी असली पहचान है। हर राज्य की अपनी परंपराएं और उत्सव हैं, जिन्हें स्थानीय लोग बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। दक्षिण भारत का सबसे प्रमुख पर्व ओणम (Onam Festival 2025) इन्हीं परंपराओं का प्रतीक है। खासतौर पर केरल में ये त्योहार पूरे 10 दिनों तक मनाया जाता है और इस दौरान राज्य का हर कोना रंग-बिरंगी सजावट, पारंपरिक व्यंजनों और लोकनृत्यों से जीवंत हो उठता है।
कब है ओणम 2025?
हिंदू पंचांग के अनुसार, ओणम हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष ओणम 2025, 5 सितंबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। हालांकि, तैयारियां और उत्सव कई दिन पहले से ही शुरू हो जाते हैं और दस दिनों तक पूरे जोश के साथ चलते हैं। केरल के अलावा देशभर में मलयाली समुदाय और उनके संगठन भी इसे बड़े पैमाने पर आयोजित करते हैं।
क्यों मनाया जाता है ओणम?
ओणम की जड़ें पौराणिक कथा से जुड़ी हैं। कहा जाता है कि प्राचीन समय में असुरों के राजा महाबली ने धरती और स्वर्ग दोनों पर अपना प्रभुत्व बना लिया था। जब देवताओं ने मदद के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की, तो उन्होंने वामन अवतार लिया।
भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। जैसे ही बलि ने हामी भरी, वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे में आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रखा और उन्हें सुतल लोक भेज दिया।
लेकिन, बलि की दानवीरता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे साल में एक बार धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आएंगे। इसी दिन का स्वागत और राजा बलि की स्मृति में ओणम पर्व मनाया जाता है।
कैसे मनाया जाता है ओणम?
ओणम का उत्सव परंपरा और खुशियों का संगम है। दस दिनों तक लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं और पुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाते हैं। लोग नए कपड़े खरीदते हैं और महिलाएं पारंपरिक व्यंजन व अचार तैयार करती हैं।
इस पर्व की खास पहचान है वल्लमकली (नौका दौड़), जिसमें सजी-धजी नावें पानी पर तेज गति से दौड़ती हैं और देखने वालों का रोमांच चरम पर पहुंच जाता है।
आठवें दिन भगवान वामन और राजा बलि की मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा की जाती है, जबकि आखिरी दिन जिसे थिरुवोनम कहते हैं, विशेष भोज ‘ओणम साध्य’ तैयार किया जाता है। इसमें केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली दर्जनों सब्जियां, चटनियां, मिठाइयां और व्यंजन शामिल होते हैं।
ओणम का संदेश
ओणम सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक अवसर है। दान, भाईचारे और समानता की भावना को याद करने का। ये त्योहार हमें सिखाता है कि असली शक्ति विजय में नहीं, बल्कि त्याग और उदारता में है।































