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रांची: JPSC घोटाले पर बड़ा मोड़: हेमंत सरकार ने छात्रों से वार्ता का प्रस्ताव रखा

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झारखंड की राजधानी रांची में जयपाल सिंह स्टेडियम में JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ 12 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों से राज्य सरकार ने आखिरकार बातचीत की पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार के प्रतिनिधि अधिकारियों ने बुधवार को स्टेडियम पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर वार्ता का प्रस्ताव दिया।

अधिकारियों का स्टेडियम पहुंचना और प्रस्ताव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसडीएम कुमार रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) धनंजय कुमार जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने छात्रों से कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रदर्शनकारियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुख्यमंत्री आवास पर बात करना चाहते हैं। अधिकारियों ने सरकार का प्रस्ताव छात्रों के सामने रखा और उनसे डेलिगेशन बनाने का अनुरोध किया।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस प्रस्ताव पर तुरंत जवाब न देते हुए दो घंटे का समय मांगा है। वे अपने बीच चर्चा कर के फैसला लेंगे। छात्रों ने साफ कर दिया है कि अगर मुख्यमंत्री से बातचीत होती है तो वो सिर्फ छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच ही होगी। किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

एक प्रदर्शनकारी छात्र ने बताया, “सरकार की ओर से अधिकारी आए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हमसे बात करना चाहते हैं। उन्होंने पांच लोगों का डेलिगेशन बनाने को कहा है। हम इस पर चर्चा करके जवाब देंगे।”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान

इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान जारी कर कहा कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच एजेंसियां जेपीएससी से जुड़े मामलों में पूरी लगन और प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं। कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और कई जगहों पर छापेमारी चल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम ठोस समाधान की ओर आगे बढ़ेंगे। जरूरत पड़ने पर मैं केंद्रीय गृह मंत्री से भी बात करूंगा। जिस किसी की भी मांगें हैं, वो आकर अपनी बात रख सकता है। हम मुद्दों से कुछ हद तक पहले से अवगत हैं और अगर वे अपने विचार रखेंगे तो सरकार उन पर गंभीरता से विचार करेगी।”

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

JPSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों के खिलाफ छात्र पिछले 12 दिनों से जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। छात्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले। कई छात्र लंबे समय से तैयारी कर रहे थे और बार-बार अनियमितताओं का शिकार होने का आरोप लगा रहे हैं।

सरकार की इस पहल को दोनों पक्षों के बीच बातचीत की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब देखना ये है कि छात्र प्रतिनिधिमंडल सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या नहीं और मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली संभावित वार्ता में क्या नतीजे निकलते हैं।

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