Tharoor Backs 30-Day Jail Rule for Leaders: संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन अहम विधेयक पेश किए, जिनमें गंभीर अपराधों के लिए 30 दिन तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने उनकी अपनी पार्टी को असहज कर दिया। थरूर ने कहा कि अगर कोई 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे मंत्री पद पर बने रहने का हक नहीं है। उन्होंने इसे सामान्य तर्क और समझ की बात बताया। यह बयान कांग्रेस की आधिकारिक राय से अलग है, क्योंकि पार्टी इस कानून को विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश मान रही है।
शशि थरूर ने कहा कि अगर कोई गंभीर अपराध के लिए 30 दिन तक हिरासत में है, तो उसे अपने पद पर बने रहने का कोई तर्क नहीं है। उन्होंने इसे आम समझ की बात बताते हुए कहा कि इस तरह के कानून को संसद की समिति में चर्चा के लिए भेजना सही कदम है। थरूर का यह बयान कांग्रेस के रुख के उलट है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि यह कानून विपक्षी नेताओं को कमजोर करने और उनकी सरकारों को अस्थिर करने का हथियार बन सकता है। थरूर के इस बयान ने न सिर्फ कांग्रेस के भीतर हलचल मचाई है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को भी विपक्ष पर हमला करने का मौका दे दिया है।
इन विधेयकों में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल हैं। संविधान संशोधन विधेयक में अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत अगर कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या दिल्ली सरकार का मंत्री गंभीर अपराध के लिए 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो उसे अपने पद से हटना होगा। अगर वह खुद इस्तीफा नहीं देता, तो राष्ट्रपति, राज्यपाल या उपराज्यपाल उसे हटा देंगे। केंद्र शासित प्रदेशों और जम्मू-कश्मीर के लिए भी यही नियम लागू होंगे।
इन विधेयकों को लेकर लोकसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह कानून संविधान के उस सिद्धांत को तोड़ता है, जिसमें कोई व्यक्ति तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसे दोषी न ठहराया जाए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने इसे विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने की साजिश करार दिया। वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे पुलिस राज की शुरुआत बताया।
अमित शाह ने इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह कानून भ्रष्टाचार और गंभीर अपराधों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। शाह ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि जब वे गुजरात के गृह मंत्री थे, तब उन पर लगे आरोपों के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था और अदालत से बरी होने तक कोई पद नहीं लिया।
थरूर का बयान कांग्रेस के लिए नया सिरदर्द बन गया है। पहले भी वे कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं। इस बार उनका यह कहना कि 30 दिन जेल में रहने वाले नेता को पद पर बने रहने का हक नहीं है, ने पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा छेड़ दी है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि थरूर का यह रुख उनकी पार्टी के नेतृत्व के साथ चल रहे मतभेदों को और उजागर करता है।
#ShashiTharoor #Congress #AmitShahBill #ConstitutionAmendment #ParliamentSession
ये भी पढ़ें: Amit Shah Bill: अमित शाह का बड़ा विधेयक; 30 दिन जेल में रहने पर हटेंगे पीएम और सीएम!































