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निठारी कांड: एक ऐसा केस जिसने देश को हिला दिया, मौत की सजा से बरी होने तक की पूरी कहानी

निठारी कांड

निठारी कांड: नोएडा से हरिद्वार तक… एक ऐसा नाम, जो करीब दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में बना रहा। जी हां, मैं बात कर रही हूं निठारी कांड की, जिसमें कभी सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया गया, कई मामलों में उसे दोषी ठहराया गया और मौत की सजा तक सुनाई गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

अदालतों में मामला आगे बढ़ा, पुराने सबूतों पर सवाल उठे, कई मामलों में दोषसिद्धियां पलट गईं और आखिरकार नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी कोली को बरी कर दिया। 12 नवंबर 2025 को वो जेल से बाहर आया।

और अब 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार से आई एक खबर ने इस पुराने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में सुरेंद्र कोली का शव एक चाय की दुकान में मिला। पुलिस के मुताबिक, वो कुछ दिनों से वहां चाय का खोखा चला रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार मामला आत्महत्या का है और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

आखिर क्या था निठारी कांड?

साल 2005-06 में नोएडा के निठारी इलाके से बच्चों और महिलाओं के लापता होने की शिकायतों ने लोगों को परेशान कर रखा था।

मामला तब देशभर में चर्चा में आया, जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित D-5 मकान के आसपास मानव अवशेष और हड्डियां मिलने की खबर सामने आई।

ये मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। इसके बाद दोनों के नाम इस मामले की जांच में सामने आए और कई अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए।

जांच में क्या सामने आया?

अभियोजन पक्ष की कहानी के मुताबिक, कोली पर बच्चों और युवतियों को D-5 मकान में लाने, उनके साथ यौन हिंसा करने और हत्या के बाद शवों को ठिकाने लगाने के आरोप लगाए गए।

जांच के दौरान मानव अवशेष और अन्य सामान बरामद किए जाने की बात सामने आई। बाद में इस मामले से जुड़े कई मुकदमों की जांच CBI ने की और अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई।

लेकिन समय के साथ इस केस की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गई – सबूतों की विश्वसनीयता।

मौत की सजा तक पहुंचा मामला

निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली को अलग-अलग अदालतों में दोषी ठहराया गया। 2009 में रिम्पा हलदर मामले में उसे मौत की सजा सुनाई गई। बाद में उसकी सजा के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई चली।

2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इस दौरान दया याचिका के निपटारे में हुई देरी को भी अदालत ने ध्यान में रखा।

लेकिन निठारी केस की कानूनी कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।

2023 में आया बड़ा मोड़

अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धियां पलट दीं। मोनिंदर सिंह पंढेर को भी कुछ मामलों में राहत मिली।

अदालत ने अभियोजन के सबूतों, कथित इकबालिया बयान और जांच की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए। यानी जिस सबूत के आधार पर वर्षों तक मामला आगे बढ़ा था, उसी की कानूनी विश्वसनीयता अब सवालों के घेरे में थी।

फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत को बरकरार रखा।

लेकिन सुरेंद्र कोली के खिलाफ एक मामला अभी भी लंबित था, जो था रिम्पा हलदर से जुड़ा मामला।

फिर आया 11 नवंबर 2025

सुप्रीम कोर्ट ने उस आखिरी मामले में भी कोली को बरी कर दिया। अदालत ने पिछली दोषसिद्धि के आधार बने सबूतों की कानूनी कमियों और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उसकी सजा रद्द कर दी।

करीब 19 साल बाद जेल से बाहर

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन, 12 नवंबर 2025 को सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आ गया।

एक ऐसा व्यक्ति जिसे कभी निठारी मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लगभग दो दशक जेल में रहने के बाद अदालतों के फैसलों के चलते रिहा हुआ।

न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, निठारी से जुड़े उसके खिलाफ लंबित दोषसिद्धियां समाप्त हो चुकी थीं।

और फिर हरिद्वार से आई आखिरी खबर…

जेल से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार में रहने लगा था। 18 सितंबर 2026 को भूपतवाला इलाके में उसकी मौत की खबर सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, वो पिछले कुछ दिनों से एक छोटी चाय की दुकान चला रहा था। सुबह करीब 11:30 बजे पुलिस को घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने के बाद शव को कब्जे में लिया गया और पहचान के लिए मिले दस्तावेजों व फोटो की जांच की गई। पुलिस ने उसकी पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

निठारी कांड आज भी क्यों बना हुआ है सवाल?

निठारी कांड की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि करीब 20 साल बाद भी इस मामले की कहानी कई सवाल अपने साथ छोड़ती है।

शुरुआत में सामने आई गुमशुदगियां, मानव अवशेषों की बरामदगी, गिरफ्तारियां, कथित इकबालिया बयान, फॉरेंसिक जांच, मौत की सजा और फिर अदालतों से लगातार मिली राहत – इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में सबूतों की विश्वसनीयता और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।

अंततः अदालतों के फैसलों के बाद सुरेंद्र कोली सभी निठारी मामलों में बरी हो चुका था। अब उसकी मौत ने इस करीब दो दशक पुराने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

फिलहाल उसकी मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच जारी है।

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