महाराष्ट्र

Fundkar Strict Policy: महाराष्ट्र में स्थानीय लोगों के लिए 80% नौकरियां, श्रम मंत्री फुंडकर की सख्त नीति

Fundkar Strict Policy: महाराष्ट्र में स्थानीय लोगों के लिए 80% नौकरियां, श्रम मंत्री फुंडकर की सख्त नीति

Fundkar Strict Policy: मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और रायगड जैसे महाराष्ट्र के औद्योगिक केंद्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र श्रम विभाग (Maharashtra Labour Department) ने साफ कर दिया है कि निजी कंपनियों में स्थानीय निवासियों और परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए नौकरियां सुनिश्चित की जाएंगी। यह ऐलान 27 मई 2025 को मंत्रालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने किया। इस बैठक में कोली समुदाय के युवाओं और पुणे के कुर्कुंभ MIDC क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं पर चर्चा हुई। यह कदम उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जिन्होंने औद्योगिक विकास के लिए अपनी जमीनें दीं, लेकिन बदले में रोजगार के अवसरों से वंचित रहे।

महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है। कोकण क्षेत्र में महाराष्ट्र श्रम विभाग (Maharashtra Labour Department) के आंकड़ों के अनुसार, 16,443 कारखाने चल रहे हैं, जो 13 लाख से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार दे रहे हैं। लेकिन इन कारखानों में स्थानीय लोगों को कितना मौका मिल रहा है? यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है। श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और कहा कि राज्य की औद्योगिक नीति के तहत निजी कंपनियों में 50% सुपरवाइजरी स्तर की नौकरियां और 80% अन्य श्रेणी की नौकरियां स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित हैं। यह नीति कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। मंत्री ने साफ किया कि स्थानीय रोजगार (Local Employment) को सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

बैठक में कोली समुदाय, जो पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने का काम करता है, पर खास ध्यान दिया गया। यह समुदाय उन परियोजनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जिनके लिए उनकी पुश्तैनी जमीनें ली गईं। उदाहरण के लिए, नवी मुंबई और रायगड में कई औद्योगिक परियोजनाओं ने कोली समुदाय की आजीविका को प्रभावित किया है। फुंडकर ने कहा कि इन परिवारों के बच्चों को उन कंपनियों में नौकरी मिलनी चाहिए, जो उनकी जमीन पर बनी हैं। यह न केवल सामाजिक न्याय की बात है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों को विकास का हिस्सा बनाने का प्रयास भी है।

पुणे के कुर्कुंभ MIDC क्षेत्र में श्रमिकों की समस्याओं ने भी इस बैठक में जगह पाई। इस क्षेत्र में कई दवा और रसायन बनाने वाली कंपनियां, जैसे सिप्ला और एमक्योर, काम करती हैं। लेकिन इन कंपनियों में सुरक्षा और पर्यावरण नियमों का पालन न करने की शिकायतें सामने आई हैं। फुंडकर ने इन कंपनियों का तुरंत निरीक्षण करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी स्थानीय रोजगार (Local Employment) की नीति या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि नियमों का उल्लंघन न हो, एक विशेष जांच दल बनाया जाएगा, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

महाराष्ट्र की औद्योगिक नीति में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियां आरक्षित करने का विचार नया नहीं है। 1968 में शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के आंदोलन के बाद इस नीति को लागू किया गया था। लेकिन इसे लागू करने में ढिलाई बरती गई। 2008 में तत्कालीन सरकार ने भी 80% नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का फैसला लिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। अब फुंडकर ने इस नीति को सख्ती से लागू करने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का फायदा उन लोगों को भी मिलना चाहिए, जिन्होंने अपनी जमीनें दीं। यह नीति न केवल कोली समुदाय, बल्कि मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और रायगड के सभी स्थानीय निवासियों के लिए लागू होगी।

बैठक में विधायक राहुल कुल, मछुआरा संघ के अध्यक्ष चंदू पाटिल, और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इनमें प्रमुख सचिव आई.ए. कुंदन, श्रम आयुक्त डॉ. एच.पी. तुम्मोड, और माथाडी बोर्ड के अध्यक्ष निखिल वाणे शामिल थे। यह सभी लोग इस बात पर सहमत थे कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। फुंडकर ने यह भी कहा कि अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे सरकारी प्रोत्साहन और छूट से वंचित किया जा सकता है। यह कदम न केवल श्रमिकों के हित में है, बल्कि यह निवेशकों को भी यह संदेश देता है कि महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी।

कुर्कुंभ MIDC में पर्यावरण प्रदूषण की शिकायतें भी गंभीर हैं। रसायन और दवा कंपनियों पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वे अपशिष्ट निपटान के नियमों का पालन नहीं करतीं। फुंडकर ने इन कंपनियों को चेतावनी दी कि अगर वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। यह कदम स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए जरूरी है।

महाराष्ट्र में निजी क्षेत्र में नौकरियों के लिए स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। कुछ लोग इसे क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने वाला कदम मानते हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक न्याय का हिस्सा मानते हैं। फुंडकर ने साफ किया कि उनका मकसद किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि उन लोगों को हक देना है, जिन्होंने औद्योगिक विकास के लिए अपनी जमीनें दीं। यह नीति उन युवाओं के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो रोजगार की तलाश में हैं।

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