Student Arrest: पुणे का एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज, जहां युवा अपने भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, हाल ही में एक विवाद के केंद्र में आ गया। 19 साल की एक छात्रा, खतीजा शेख, ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें पाकिस्तान जिंदाबाद (Pakistan Zindabad) जैसे शब्द थे। यह पोस्ट भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल के दौरान सामने आई, जब ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर देश में गहमागहमी थी। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद पुणे पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और छात्रा को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यह मामला यहीं नहीं रुका। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए सरकार और कॉलेज को कठघरे में खड़ा किया।
9 मई 2025 को पुणे के कोंढवा इलाके में रहने वाली खतीजा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उसने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत भारत की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की और “पाकिस्तान जिंदाबाद” लिखा। यह पोस्ट एक हिंदू संगठन की शिकायत के बाद पुलिस के रडार पर आई। कोंढवा पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (राष्ट्रीय अखंडता को खतरा), 196 (समूहों के बीच दुश्मनी), 197 (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ टिप्पणी), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस), 352 (जानबूझकर अपमान), और 353 (सार्वजनिक अशांति) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने खतीजा को गिरफ्तार कर पांच दिन की हिरासत में भेज दिया। इस बीच, सिंहगढ़ एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने उसे कॉलेज से निष्कासित कर दिया, यह कहते हुए कि उसकी पोस्ट ने संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाया।
पोस्ट में खतीजा ने दावा किया था कि भारत ने बिना सबूत के पाकिस्तान पर पहलगाम में हमले का आरोप लगाया और तीन बड़े नागरिक इलाकों पर बमबारी की। उसने इसे “हिंदुत्व आतंकवाद” और “इस्लाम विरोधी” करार दिया। यह पोस्ट ऐसे समय में आई जब भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर तनाव चरम पर था। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में कार्रवाई की थी, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, और राजस्थान में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट ने तुरंत हंगामा मचा दिया। कुछ यूजर्स ने इसे देशद्रोह करार दिया, तो कुछ ने कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस उपायुक्त राजकुमार शिंदे ने कहा कि सोशल मीडिया पर राष्ट्रविरोधी सामग्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महाराष्ट्र ATS और NIA ने भी जांच में हिस्सा लिया, यह जानने के लिए कि क्या खतीजा किसी कट्टरपंथी समूह से जुड़ी है। हालांकि, शुरुआती जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। खतीजा ने पोस्ट डिलीट कर दी और माफी मांगी, लेकिन तब तक मामला बढ़ चुका था। स्थानीय संगठनों ने पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया, और कॉलेज ने उसे निष्कासित कर दिया।
इसके बाद खतीजा की वकील फरहाना शाह ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि गिरफ्तारी और निष्कासन मनमाना है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। 27 मई 2025 को जस्टिस गौरी गोडसे और जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार और कॉलेज की कार्रवाई को “कट्टरपंथी” और “अनुचित” बताया। जस्टिस गौरी गोडसे ने कहा कि एक 19 साल की छात्रा ने अपनी राय व्यक्त की, गलती का एहसास हुआ, और उसने माफी मांगी। फिर भी, उसे कट्टर अपराधी की तरह जेल भेजा गया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सरकार और कॉलेज उसकी जिंदगी बर्बाद करना चाहते हैं।
हाईकोर्ट ने तुरंत जमानत देने का आदेश दिया ताकि खतीजा अपनी सेमेस्टर परीक्षाओं में शामिल हो सके। कोर्ट ने कॉलेज के निष्कासन आदेश को भी निलंबित कर दिया और उसे हॉल टिकट जारी करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि कॉलेज का काम सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों को सुधारने का मौका देना भी है। खतीजा को यरवदा जेल से उसी दिन रिहा करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं थी, क्योंकि उसने तुरंत पोस्ट हटा दी थी और पश्चाताप व्यक्त किया था।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचाई। कुछ लोगों ने खतीजा की गिरफ्तारी को सही ठहराया, तो कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि ऐसी कट्टरपंथी प्रतिक्रियाएं समाज में और तनाव पैदा कर सकती हैं। खतीजा के मामले ने यह सवाल उठाया कि क्या युवाओं को अपनी राय रखने की सजा दी जानी चाहिए।
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