इंदौर में हाल ही में सामने आए ‘करोड़पति भिखारी’ मांगीलाल के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में जिस व्यक्ति को भिखारी बताते हुए करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताया जा रहा था, उसने खुद सामने आकर इन दावों को गलत बताया है।
मांगीलाल का कहना है कि वो भिखारी नहीं है और उसकी तस्वीर गलत तरीके से वायरल कर दी गई, जिससे उसे और उसके परिवार को सामाजिक तौर पर नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
दरअसल, इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान प्रशासन ने सराफा इलाके से कुछ लोगों को रेस्क्यू किया था। इसी दौरान मांगीलाल नाम के एक बुजुर्ग को भी आश्रय गृह भेजा गया। शुरुआती जांच में प्रशासन की ओर से ये दावा किया गया कि मांगीलाल के नाम पर कई मकान, वाहन और अन्य संपत्तियां हैं। इसके बाद ये खबर तेजी से फैली कि इंदौर में एक “करोड़पति भिखारी” मिला है।
परिवार ने बताया अलग सच
अब मांगीलाल के परिवार और रिश्तेदार सामने आए हैं और उन्होंने पूरे मामले को गलतफहमी बताया है। परिजनों का कहना है कि मांगीलाल सराफा इलाके में भीख नहीं मांगता था, बल्कि वहां लोगों से पैसे की वसूली के सिलसिले में जाता था, जिसे गलत तरीके से भिक्षावृत्ति से जोड़ दिया गया।
परिवार का ये भी कहना है कि जिन संपत्तियों को मांगीलाल के नाम बताया जा रहा है, उनमें से कई संपत्तियां अन्य परिजनों के नाम दर्ज हैं और कुछ मामलों में कानूनी विवाद भी चल रहा है।
“मेरी छवि खराब की गई” – मांगीलाल
मांगीलाल ने कहा कि उसे बिना पूरी जांच के भिखारी बताकर उसकी फोटो वायरल कर दी गई, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उसका कहना है कि वह लंबे समय से मेहनत-मजदूरी और अन्य छोटे कामों से अपनी आजीविका चलाता रहा है।
प्रशासन ने जांच की बात कही
प्रशासन की ओर से अब कहा गया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की दोबारा जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, किसी को भी भिखारी या संपन्न व्यक्ति घोषित करने से पहले पूरी सत्यापन प्रक्रिया जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी कि मांगीलाल की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति क्या है।
सोशल मीडिया ट्रायल पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना पूरी जानकारी के सोशल मीडिया और खबरों में किसी व्यक्ति की पहचान तय कर देना कितना सही है। मांगीलाल प्रकरण में एक व्यक्ति को “करोड़पति भिखारी” कहे जाने से पहले न तो उसका पक्ष सामने आया और न ही सभी तथ्यों की पुष्टि की गई।
जांच जारी, अंतिम सच आना बाकी
फिलहाल मांगीलाल का मामला जांच के दायरे में है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं दोनों ही पहलुओं से इसे देख रही हैं। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला वास्तव में संपन्न भिखारी का था या फिर एक गलतफहमी का नतीजा।
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