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Swami Avimukteshwarananda POCSO case: पॉक्सो केस में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तल्ख तेवर, बोलें, “गिरफ्तारी का विरोध नहीं, जनता की अदालत करेगी फैसला”

Swami Avimukteshwarananda POCSO case
Swami Avimukteshwarananda POCSO case

Swami Avimukteshwarananda POCSO case: धर्मनगरी काशी में एक गंभीर कानूनी विवाद ने आध्यात्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को मीडिया के सामने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि कानून उन्हें गिरफ्तार करना चाहता है, तो वे इसका कतई विरोध नहीं करेंगे। स्वामी ने इस पूरे मामले को एक व्यापक नजरिए से पेश करते हुए ‘तीन अदालतों’ का जिक्र किया।

तीन अदालतों का जिक्र: “मुझे मिल चुकी है क्लीन चिट”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए न्याय के तीन पैमानें होते हैं:

  • जनता की अदालत: जो वर्तमान घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है और अंततः अपना फैसला सुनाएगी।
  • अंतरात्मा की अदालत: स्वामी ने दावा किया कि उनकी अपनी अंतरात्मा पूरी तरह साफ है।
  • सुप्रीम कोर्ट: उन्होंने विश्वास जताया कि देश की सर्वोच्च अदालत सत्य और असत्य के बीच के अंतर को भली-भांति जानती है।

स्वामी का कहना है कि उन्हें इन तीनों ही स्तरों पर ‘क्लीन चिट’ मिल चुकी है, इसलिए उन्हें किसी भी कार्रवाई का भय नहीं है।

विवाद की जड़: गंभीर आरोप और एफआईआर
यह पूरा मामला उस समय गरमाया जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई।

शिकायतकर्ता: एफआईआर के अनुसार, मुख्य शिकायतकर्ताओं में स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और दो अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

  • आरोप: आरोप लगाया गया है कि गुरुकुल और हाल ही में संपन्न हुए माघ मेले के दौरान धार्मिक आयोजनों की आड़ में यौन शोषण जैसी घटनाएं हुईं।
  • धाराएं: चूंकि मामला नाबालिगों से जुड़े उत्पीड़न के आरोपों के इर्द-गिर्द है, इसलिए इसमें पॉक्सो एक्ट जैसी कठोर धाराएं लगाई गई हैं।

धार्मिक खेमों में खींचतान
इस मामले ने न केवल कानूनी बल्कि धार्मिक रूप ले लिया है। एक तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं, तो दूसरी तरफ स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य। वाराणसी की जनता और देशभर के श्रद्धालु इस विवाद को लेकर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कहना कि “जनता सब देख रही है”, इस ओर इशारा करता है कि वे इस लड़ाई को जनता के बीच ले जाने और अपनी छवि स्पष्ट करने की तैयारी में हैं।

फिलहाल गेंद पुलिस और जांच एजेंसियों के पाले में है। जहां एक तरफ गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ आध्यात्मिक गुरु का खुला चैलेंज कि वे गिरफ्तारी से पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले दिनों में वाराणसी पुलिस की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

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