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महाराष्ट्र में थमा ‘चक्का जाम’ का शोर: सरकार के लिखित आश्वासन के बाद ट्रांसपोर्टरों ने वापस ली हड़ताल

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महाराष्ट्र में थमा ‘चक्का जाम’ का शोर: महाराष्ट्र के परिवहन क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जारी अनिश्चितता के बादल अब छंट गए हैं। मनमाने ई-चालान और आरटीओ अधिकारियों की कथित वसूली के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (M-TAC) समेत विभिन्न यूनियनों ने अपनी राज्यव्यापी हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से मिले ठोस और लिखित आश्वासन के बाद ट्रांसपोर्टरों ने जनहित में अपने कदम पीछे खींचे हैं।

सड़कों पर उतरा था आक्रोश
गुरुवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में नजारा बेहद तनावपूर्ण था। आरटीओ परिसरों के बाहर हजारों की संख्या में ट्रांसपोर्टर्स जमा हुए और ‘ई-चालान’ की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ट्रांसपोर्टरों का मुख्य आरोप था कि बिना किसी ठोस आधार के भारी-भरकम चालान काटे जा रहे हैं, जिससे उनका व्यवसाय चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है।

मैराथन बैठक और समाधान की राह
हड़ताल के गंभीर होते रुख को देखते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ट्रांसपोर्टर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान सत्ता के गलियारों में भी हलचल तेज रही:

  • मुख्यमंत्री का दखल: मंत्री सरनाईक ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विस्तार से चर्चा की गई है।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संवाद: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सीधे ट्रांसपोर्टर संगठनों से बात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ट्रांसपोर्टरों की मांगों पर पूरी तरह सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।

“राष्ट्र हित सर्वोपरि”: M-TAC का रुख
सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद एम-टीएसी (M-TAC) के सदस्य बाल मलकीत सिंह ने हड़ताल स्थगित करने की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने कहा, “हमें परिवहन क्षेत्र की चिंताओं और मांगों के संबंध में सरकार से लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ है। इन आश्वासनों और राज्य तथा राष्ट्र के व्यापक हित (आपूर्ति श्रृंखला न प्रभावित हो) को ध्यान में रखते हुए हमने फिलहाल हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया है।

ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें जिन पर बनी सहमति:
  • ई-चालान की समीक्षा: मनमाने ढंग से काटे जा रहे ऑनलाइन चालानों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना।
  • आरटीओ सुधार: क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और वसूली की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई।
  • लिखित गारंटी: केवल मौखिक आश्वासन के बजाय सरकार की ओर से आधिकारिक पत्र के माध्यम से समाधान की समय सीमा तय करना।

इस हड़ताल की समाप्ति से आम जनता और व्यापारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट बंद होने से आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और महंगाई का खतरा मंडराने लगा था। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं कि वे लिखित आश्वासनों को कितनी जल्दी धरातल पर उतारते हैं।

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