US-Israel-Iran War: ईरान की राजधानी तेहरान इस वक्त आधुनिक युद्ध के सबसे वीभत्स दौर से गुजर रही है। रविवार को अमेरिका और इजराइल के लड़ाकू विमानों ने तेहरान के आसमान को चीरते हुए ऐसी भीषण बमबारी की, जिसने पूरे शहर को आग के दरिया में तब्दील कर दिया है। यह हमला रणनीतिक रूप से ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के इरादे से किया गया था, जिसका असर अब एक मानवीय और पर्यावरणीय आपदा के रूप में सामने आ रहा है।
The price of oil is about to skyrocket and Donald Trump literally told us he basically doesn’t care.
Israel controls the Trump Administration and everyone knows it.
We are in a war with Iran and the Right-Wing goyslop shills won’t admit it.
MAGA is dead.
America Last. pic.twitter.com/rpZnmwzkys
— Evan Kilgore 🇺🇸 (@EvanAKilgore) March 7, 2026
30 तेल डिपो खाक: धुआं बना काल
हमले का मुख्य निशाना तेहरान के बाहरी और आंतरिक हिस्सों में स्थित 30 बड़े ऑयल डिपो थे। धमाके इतने जोरदार थे कि उनकी गूंज मीलों दूर तक सुनाई दी। इन डिपो के तबाह होने से लाखों गैलन कच्चा तेल और ईंधन धू-धू कर जल उठा। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि तेहरान का आसमान काला पड़ गया और धुएं का गुबार बादलों में जा मिला।
तेहरान में ‘एसिड रेन’: आसमान से बरसा जहर
इस युद्ध ने प्रकृति को भी जहरीला बना दिया है। जलते हुए तेल से निकले टॉक्सिक हाइड्रोकार्बन और सल्फर के मिश्रण ने वायुमंडल में एक घातक रसायनिक प्रक्रिया को जन्म दिया। इसके परिणामस्वरूप रविवार को तेहरान के कई इलाकों में ‘एसिड रेन’ (अम्लीय वर्षा) हुई।
- स्थानीय निवासियों के अनुसार, बारिश के पानी के साथ काला तेल और रसायन जमीन पर गिरे हैं।
- जल स्रोतों की ऊपरी सतह पर तेल की मोटी परत जम गई है, जिससे पूरा शहर एक ‘टाइम बम’ बन गया है—पानी की सतह पर जमा यह तेल किसी भी छोटी चिंगारी से भीषण आग पकड़ सकता है।
90 लाख की आबादी ‘कैद’: अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात
लगभग 90 लाख की आबादी वाला यह महानगर आज एक भूतिया शहर (Ghost Town) में तब्दील हो गया है।
- अघोषित कर्फ्यू: सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और लोग डर के मारे अपने घरों में दुबके हुए हैं।
- ठप हुई सेवाएं: बमबारी के कारण शहर के बड़े हिस्से में बिजली की सप्लाई काट दी गई है और पाइपलाइनों के क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट खड़ा हो गया है।
- स्वास्थ्य का खतरा: हवा में मौजूद जहरीली गैसों और सल्फर के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायतें आ रही हैं।
रणनीतिक घेराबंदी या तबाही की शुरुआत?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑयल डिपो को निशाना बनाना ईरान की सैन्य रसद (Logistics) और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पंगु बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। बिना ईंधन के ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता काफी सीमित हो जाएगी। हालांकि, इस हमले ने तेहरान को जिस पर्यावरणीय संकट में धकेला है, उसका असर आने वाले कई दशकों तक देखा जा सकता है।
मौजूदा स्थिति: तेहरान की सड़कों पर जमा जहरीला पानी और तेल की परतें बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस भीषण हमले और उसके बाद उपजे मानवीय संकट पर गहरी चिंता जता रहा है।































