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देशभर के बड़े Restaurant पर आयकर विभाग की रेड, ₹70 हजार करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा

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देश के Restaurant सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा टैक्स घोटाला सामने आया है। Income Tax Department ने देशभर में कई बड़े Restaurant और फूड चेन पर छापेमारी कर करीब ₹70,000 करोड़ की संभावित टैक्स चोरी के मामले की जांच शुरू की है। माना जा रहा है कि ये कार्रवाई भारत के रेस्टोरेंट उद्योग में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स जांचों में से एक है।

जांच के तहत आयकर विभाग की टीमों ने देश के कई राज्यों में एक साथ सर्वे और रेड की कार्रवाई की। इस कार्रवाई में Delhi, Mumbai, Gujarat, Karnataka, Tamil Nadu, Telangana और Andhra Pradesh समेत कई जगहों पर जांच की गई। जानकारी के अनुसार देश के करीब 45 शहरों में 70 से अधिक रेस्टोरेंट्स को जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई Central Board of Direct Taxes के निर्देश पर की गई है और इसका मुख्य उद्देश्य रेस्टोरेंट्स द्वारा संभावित रूप से छिपाई गई आय और बिक्री की जांच करना है।

इस बड़े घोटाले का खुलासा शुरुआत में एक सामान्य जांच के दौरान हुआ था। Hyderabad के कुछ मशहूर बिरयानी रेस्टोरेंट्स के बिलों में गड़बड़ी मिलने के बाद आयकर विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की। शुरुआती जांच में सामने आया कि कुछ रेस्टोरेंट्स अपनी असली बिक्री से कम टर्नओवर दिखा रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा धीरे-धीरे पूरे देश के रेस्टोरेंट सेक्टर तक बढ़ा दिया गया।

जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि कई रेस्टोरेंट्स ने वर्ष 2019-20 से अब तक हजारों करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई है, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर टैक्स का नुकसान हुआ है। जांच में सबसे बड़ा खुलासा रेस्टोरेंट्स द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बिलिंग सॉफ्टवेयर में हेरफेर को लेकर हुआ। बताया जा रहा है कि कुछ जगहों पर बिल बनने के बाद रिकॉर्ड से उसे डिलीट कर दिया जाता था, कई कैश ट्रांजेक्शन को सिस्टम से हटा दिया जाता था और कुछ तारीखों की पूरी बिलिंग को मिटा दिया जाता था। इस तरीके से असली बिक्री कम दिखाकर टैक्स बचाया जाता था। जांच एजेंसियों ने इस प्रक्रिया को “वैनिशिंग बिल ट्रिक” नाम दिया है।

इस मामले की जांच के लिए आयकर विभाग ने आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया। अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से करीब 60 टेराबाइट डिजिटल बिलिंग डेटा का विश्लेषण किया। इस डेटा में लाखों रेस्टोरेंट्स के रिकॉर्ड शामिल थे। डेटा विश्लेषण के दौरान ये पाया गया कि कई रेस्टोरेंट्स की बिलिंग सिस्टम में दर्ज बिक्री और टैक्स रिटर्न में दिखाई गई आय के बीच बड़ा अंतर मौजूद था।

प्रारंभिक जांच में Karnataka, Telangana, Tamil Nadu, Maharashtra और Gujarat जैसे राज्यों में ज्यादा गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। इन राज्यों में कई रेस्टोरेंट्स पर बिक्री के आंकड़े छिपाने और टैक्स चोरी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

आयकर विभाग का कहना है कि फिलहाल ये जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी Restaurant चेन और बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनियां जांच के दायरे में आ सकती हैं। अगर आरोप साबित होते हैं तो संबंधित कंपनियों से टैक्स की वसूली की जाएगी और उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

₹70,000 करोड़ की इस कथित टैक्स चोरी ने देश के रेस्टोरेंट उद्योग में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ये मामला इस बात का भी संकेत देता है कि अब टैक्स जांच में डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर होने वाली टैक्स चोरी का पता लगाना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

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