देश-विदेश

US-Israel-Iran War: न्यूक्लियर वॉर का साया; खाड़ी देशों ने शुरू की परमाणु हमले से बचाव की तैयारी, भारत से मांगी ‘प्रशियन ब्लू’ कैप्सूल

US-Israel-Iran War
US-Israel-Iran War

US-Israel-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) की रातों की नींद उड़ा दी है। युद्ध की आहट के बीच अब इन देशों ने ‘न्यूक्लियर इमरजेंसी’ (परमाणु आपातकाल) से निपटने के लिए अपनी मेडिकल डिफेंस प्रणाली को मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बहरीन के एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक प्रतिष्ठित दवा कंपनी से संपर्क साधकर ‘प्रशियन ब्लू’ (Prussian Blue) कैप्सूल्स की भारी खेप के लिए पूछताछ की है।

क्या है ‘प्रशियन ब्लू’ और यह क्यों है खास?
प्रशियन ब्लू केवल एक दवा नहीं, बल्कि परमाणु विकिरण (Radiation) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है।

  • DRDO की तकनीक: यह दवा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
  • रेडियोएक्टिविटी पर प्रहार: यह शरीर के भीतर प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्वों (जैसे सीज़ियम और थैलियम) के प्रभाव को कम करती है और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।
  • उपयोग: परमाणु विस्फोट या रेडियोधर्मी रिसाव की स्थिति में यह दवा जीवनरक्षक साबित होती है।

खाड़ी देशों में हाई अलर्ट: बहरीन से जॉर्डन तक सप्लाई की तैयारी
चंडीगढ़ स्थित कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, बहरीन के एजेंट के साथ बातचीत एडवांस स्टेज पर है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो दवाओं की यह खेप निम्नलिखित देशों में सप्लाई की जाएगी:

  • बहरीन
  • कुवैत
  • कतर
  • जॉर्डन

वर्तमान में एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इस दवा का निर्माण हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में किया जाएगा।

उम्र के अनुसार डोज की गणित: क्या है एजेंट की क्वेरी?
विदेशी एजेंट ने कंपनी से केवल उपलब्धता ही नहीं, बल्कि इसके वैज्ञानिक पहलुओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है, जैसे:

  • आयु वर्ग: अलग-अलग उम्र के लोगों (बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों) के लिए डोज की मात्रा क्या होनी चाहिए?
  • क्षमता: आपातकालीन स्थिति में कंपनी कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है?

इतिहास की पुनरावृत्ति: जून 2025 का संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब इस जीवनरक्षक दवा की मांग अचानक बढ़ी है। इससे पहले जून 2025 में भी इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान इसी तरह की मांग सामने आई थी। हालांकि, उस समय 12 दिनों के भीतर युद्ध विराम हो जाने के कारण बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई थी। लेकिन इस बार अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों को दीर्घकालिक तैयारी करने पर मजबूर कर दिया है।

परमाणु विकिरण और शरीर पर प्रभाव: एक तुलनात्मक अध्ययन
रेडियोधर्मी तत्वप्रशियन ब्लू का प्रभाव
रेडियोएक्टिव सीज़ियमशरीर से उत्सर्जन की गति को लगभग 3 गुना तक बढ़ा देता है
थैलियम जहरशरीर के अंगों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है
सुरक्षा चक्रपाचन तंत्र में रेडियोधर्मी तत्वों को सोखकर उन्हें रक्त में मिलने से रोकता है

You may also like