अभी मानसून आने में दो महीने का समय शेष है, लेकिन मुंबई के कांदिवली इलाके के निवासियों को भीषण जलजमाव का सामना करना पड़ रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि यह ‘बाढ़’ कुदरत के कहर से नहीं, बल्कि पश्चिम रेलवे की कथित घोर लापरवाही के कारण आई है। गुरुवार को पोयसर नदी का दूषित पानी अचानक लोगों के घरों में घुस गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मलवे ने रोका रास्ता, बन गया 7 फीट का ‘जलाशय’
स्थानीय नगरसेवक शिवकुमार झा ने रेलवे प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, पश्चिम रेलवे कांदिवली में नए ट्रैक बिछाने का काम कर रही है। इस निर्माण कार्य के दौरान सैकड़ों टन मलबा बिना किसी योजना या पूर्व सूचना के सीधे पोयसर नदी के पात्र में फेंक दिया गया।
मलबे के ढेर ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे नदी के पीछे के हिस्से में करीब 7 फीट गहरा कृत्रिम जलाशय बन गया। पानी की निकासी का कोई रास्ता न होने के कारण नदी ओवरफ्लो हो गई और नाले का गंदा पानी रिहायशी इलाकों में फैल गया।
200 से ज्यादा घरों में घुसा गंदा पानी
इस जलजमाव का सबसे बुरा असर वार्ड नंबर 23 के अंतर्गत आने वाली निर्मल सिंह चॉल और पांडे मिश्रा चॉल पर पड़ा है। यहाँ के 200 से अधिक घरों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर गया है। बिना बारिश के घरों में घुसा नाले का पानी देखकर लोग सहम गए। निवासियों का सारा घरेलू सामान, राशन और कीमती वस्तुएं खराब हो गई हैं, साथ ही महामारी फैलने का डर भी सता रहा है।
पुरानी गलतियों से नहीं सीखा सबक
नगरसेवक शिवकुमार झा ने तंज कसते हुए कहा कि रेलवे प्रशासन अपनी पुरानी गलतियों को दोहरा रहा है। उन्होंने बताया, पिछले वर्ष भी रेलवे ने बिना किसी पूर्व सूचना के काम शुरू कर दिया था, जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इस साल भी वही कहानी दोहराई गई है। रेलवे का काम जरूरी हो सकता है, लेकिन जनता की सुरक्षा और संपदा की कीमत पर विकास का क्या मतलब?”
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
प्रभावित क्षेत्र नुकसान का विवरण कारण
वार्ड नं. 23 (कांदिवली) 200+ घरों में 2 फीट पानी पोयसर नदी में रेलवे का मलबा।
निर्मल सिंह चॉल घरेलू सामान और राशन खराब पानी की निकासी का बाधित होना।
पांडे मिश्रा चॉल जलजमाव और संक्रमण का खतरा रेलवे की बिना सूचना की गई कार्रवाई।
प्रशासन से मांग
स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि रेलवे तुरंत नदी से मलबे को हटाए और पानी की निकासी सुनिश्चित करे। साथ ही, प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मानसून शुरू होने पर स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
विकास कार्यों के नाम पर प्राकृतिक जल निकासी को रोकना न केवल लापरवाही है, बल्कि जनता के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। रेलवे और बीएमसी (BMC) के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा एक बार फिर मुंबई के आम नागरिक को भुगतना पड़ रहा है।
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