मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े के सोशल मीडिया प्रबंधन को लेकर नया विवाद सामने आया है। मामला मुंबई महानगरपालिका (BMC) की स्थायी समिति के सामने रखे गए एक प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें मेयर कार्यालय के सोशल मीडिया संचालन के लिए ₹25 लाख 12 हजार 786 रुपये के खर्च का उल्लेख किया गया है।
दस्तावेज के सामने आने के बाद मेयर के सोशल मीडिया प्रचार पर अलग से करोड़ों या लाखों रुपये खर्च किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, BMC और मेयर कार्यालय ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि मेयर के प्रचार के लिए कोई अलग बजट या अलग एजेंसी नियुक्त नहीं की गई है।
क्या है ₹25.12 लाख का पूरा मामला?
स्थायी समिति के सामने रखे गए प्रस्ताव के अनुसार, मेयर कार्यालय के सोशल मीडिया संचालन से जुड़े काम के लिए एक साल की अवधि का प्रावधान किया गया है। ये अवधि 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2027 तक बताई गई है।
प्रस्ताव में मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 69-क की संशोधित व्यवस्था के तहत सोशल मीडिया से संबंधित काम के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है।
इसी प्रस्ताव में ₹25,12,786 की राशि का उल्लेख है। दस्तावेज सामने आने के बाद ये सवाल उठने लगा कि क्या ये राशि केवल मेयर के सोशल मीडिया प्रचार और प्रबंधन पर खर्च की जानी है।
मेयर कार्यालय ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद मेयर कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि मेयर के सोशल मीडिया प्रचार के लिए अलग से ₹25 लाख खर्च करने की कोई योजना नहीं है।
मेयर कार्यालय के मुताबिक, BMC के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संभालने के लिए पहले से ही एक एजेंसी नियुक्त है। ये एजेंसी महानगरपालिका के सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन के साथ-साथ जरूरी तकनीकी मानव संसाधन भी उपलब्ध कराती है। कार्यालय का कहना है कि इसी व्यवस्था के तहत मेयर कार्यालय से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी संचालित किए जा रहे हैं।
एक साल के लिए एजेंसी की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव
मेयर कार्यालय के अनुसार, संबंधित एजेंसी की सेवाओं को अगस्त 2026 से जुलाई 2027 तक एक और साल के लिए जारी रखने का प्रस्ताव स्थायी समिति के स्तर पर पहले ही मंजूर किया जा चुका है।
इसलिए मेयर कार्यालय का दावा है कि ₹25.12 लाख को मेयर के निजी या व्यक्तिगत प्रचार का खर्च बताना सही नहीं है। यह राशि BMC के व्यापक सोशल मीडिया प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी और मानव संसाधन सेवाओं का हिस्सा है।
मेयर ने अलग एजेंसी नियुक्त करने का कोई निर्देश नहीं दिया: कार्यालय
मेयर कार्यालय ने ये भी कहा है कि मेयर की ओर से सोशल मीडिया के लिए किसी अलग एजेंसी की नियुक्ति या व्यक्तिगत प्रचार के लिए अलग से बजट खर्च करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
कार्यालय के मुताबिक, मौजूदा एजेंसी के माध्यम से ही संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों को संभाला जा रहा है। ऐसे में मेयर के प्रचार के लिए अलग से ₹25 लाख खर्च किए जाने की बात को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
फिर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
BMC की सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसकी मुख्य वजह स्थायी समिति के सामने पेश किया गया दस्तावेज है।
दस्तावेज में ₹25,12,786 की राशि और मेयर कार्यालय के सोशल मीडिया संचालन का उल्लेख होने से ये सवाल उठ रहा है कि अगर ये खर्च पूरे BMC के सोशल मीडिया प्रबंधन के लिए नियुक्त एजेंसी के अनुबंध का हिस्सा है, तो प्रस्ताव में इसे विशेष रूप से मेयर कार्यालय के सोशल मीडिया संचालन से क्यों जोड़ा गया?
यही अंतर अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
पहले भी जनसंपर्क को लेकर हुआ था विवाद
मेयर ऋतु तावड़े के कार्यालय से जुड़ा ये पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी मेयर के जनसंपर्क से संबंधित निविदा को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
अब सोशल मीडिया प्रबंधन से जुड़े प्रस्ताव ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। विपक्ष की ओर से इस मामले को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है, जबकि BMC का पक्ष है कि इसे मेयर के व्यक्तिगत प्रचार पर होने वाले अलग खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विवाद की असली तस्वीर क्या है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ये कहना सही नहीं होगा कि मेयर के व्यक्तिगत प्रचार के लिए अलग से ₹25 लाख खर्च किए जा रहे हैं। BMC और मेयर कार्यालय का कहना है कि राशि पहले से नियुक्त एजेंसी की सोशल मीडिया प्रबंधन और तकनीकी मानव संसाधन सेवाओं से संबंधित है।
वहीं, स्थायी समिति के दस्तावेज में राशि को मेयर कार्यालय के सोशल मीडिया संचालन से जोड़े जाने के कारण सवाल जरूर खड़े हुए हैं।
अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात ये होगी कि BMC के संबंधित टेंडर दस्तावेज, कार्यक्षेत्र (Scope of Work) और भुगतान की शर्तों में ₹25.12 लाख की राशि किन सेवाओं के लिए निर्धारित की गई है। इन्हीं दस्तावेजों से स्पष्ट होगा कि ये राशि पूरे BMC के सोशल मीडिया प्रबंधन का हिस्सा है या मेयर कार्यालय के लिए कोई अलग व्यवस्था है।
फिलहाल BMC की सफाई के बाद भी ₹25.12 लाख के प्रस्ताव और उसके वास्तविक इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता का सवाल चर्चा में बना हुआ है।
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