मुंबई में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है। घाटकोपर में लगभग चार दशक पुराने रेलवे ओवरब्रिज की जगह अब अत्याधुनिक केबल-स्टेयड ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। ये नया पुल शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन को अधिक सुगम बनाएगा और लाल बहादुर शास्त्री (LBS) मार्ग, अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड (AGLR) तथा जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड (JVLR) पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और महाराष्ट्र रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MRIDC) संयुक्त रूप से पूरा करेंगे।
40 साल पुराने पुल की जगह बनेगा नया आधुनिक ब्रिज
घाटकोपर रेलवे ब्रिज कई वर्षों तक एलबीएस मार्ग और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के बीच मुख्य संपर्क मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा। लेकिन वर्ष 2018 में तकनीकी जांच के दौरान पुल को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद इसे वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था।
इसके बाद से वाहन चालकों को अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड और जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड जैसे वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ा, जहां व्यस्त समय में लंबा ट्रैफिक जाम आम बात बन गई। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए पुराने पुल को हटाकर नया केबल-स्टेयड ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया है।
कैसा होगा नया केबल-स्टेयड ब्रिज?
प्रस्तावित पुल मुंबई के पूर्वी उपनगरों का पहला प्रमुख केबल-स्टेयड ब्रिज होगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ये होगी कि ये एक साथ कई महत्वपूर्ण परिवहन परियोजनाओं के ऊपर से कर गुजरेगा। इस पुल का निर्माण सेंट्रल रेलवे की रेल पटरियों के ऊपर, निर्माणाधीन मेट्रो लाइन-4 के मार्ग के ऊपर, और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के भूमिगत कॉरिडोर के ऊपर किया जाएगा।
जहां अधिकांश हिस्सा केबल-स्टेयड तकनीक से तैयार होगा, वहीं कुछ हिस्सों में विशेष बोस्ट्रिंग स्टील स्पैन तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि संरचना अधिक मजबूत और सुरक्षित रहे।
पैदल यात्रियों को भी मिलेगी सुविधा
ये परियोजना केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी सुविधाजनक होगी। पुल पर दोनों ओर चौड़े फुटपाथ बनाए जाएंगे, जिससे लोगों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की सुविधा मिलेगी।
निर्माण कई चरणों में होगा पूरा
प्रशासन के अनुसार पुल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित न हो।
योजना के तहत जैसे ही पुल का एक हिस्सा तैयार होगा, उस पर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद दूसरे हिस्से का निर्माण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण कार्य के दौरान लोगों को कम से कम असुविधा पहुंचाना है।
2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब 108 मीटर लंबे इस पुल में लगभग 92 मीटर का बोस्ट्रिंग स्टील स्पैन बनाया जाएगा, जबकि एलबीएस मार्ग के ऊपर लगभग 90 मीटर लंबा विशेष स्पैन तैयार होगा।
इसके अलावा रेलवे पुल के नीचे एक सर्विस रोड भी विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय यातायात को अलग मार्ग मिल सके। परियोजना को साल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
किन इलाकों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा?
नया पुल तैयार होने के बाद कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से लाभ मिलने वाले प्रमुख क्षेत्र घाटकोपर पूर्व और पश्चिम, एलबीएस मार्ग, अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड, जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, पंत नगर, गांधीनगर, विक्रोली, साकी नाका, मारोल और मुंबई एयरपोर्ट जाने वाला मार्ग शामिल है।
इन इलाकों में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
यात्रा होगी तेज और आसान
वर्तमान में गोलीबार रोड और घाटकोपर पश्चिम से आने वाले अधिकांश वाहन एलबीएस मार्ग पर भारी जाम का सामना करते हैं। वहीं ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से पश्चिमी उपनगरों की ओर जाने वाले वाहन बड़ी संख्या में JVLR का उपयोग करते हैं, जिससे गांधीनगर और विक्रोली क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है।
नया केबल-स्टेयड ब्रिज तैयार होने के बाद इन मार्गों पर यातायात का बेहतर वितरण होगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और लोगों को बार-बार लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
घाटकोपर में बनने वाला नया केबल-स्टेयड ब्रिज मुंबई के परिवहन नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना साबित हो सकता है। ये केवल पुराने और असुरक्षित पुल की जगह नहीं लेगा, बल्कि शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच संपर्क को और अधिक सुगम बनाएगा। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से तैयार होने वाला ये पुल भविष्य की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक सफर का लाभ मिलने की उम्मीद है।
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