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ईरान की बड़ी कार्रवाई, इजरायल के लिए जासूसी के दोषी होसैन पदरान को फांसी

होसैन पदरान
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तेहरान: ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में दोषी ठहराए गए होसैन पदरान को फांसी दे दी है। ईरानी न्यायपालिका के मुताबिक, पदरान पर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान के सैन्य और मिसाइल ठिकानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने का आरोप था। ईरानी न्यायपालिका की समाचार एजेंसी मिजान के अनुसार, देश की सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा था।

इस्फहान के सैन्य ठिकानों की जानकारी देने का आरोप

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, पदरान ने मध्य ईरान के इस्फहान प्रांत में मौजूद संवेदनशील सैन्य और मिसाइल ठिकानों से जुड़ी जानकारी मोसाद तक पहुंचाई थी। न्यायपालिका का दावा है कि इस जासूसी गतिविधि के बदले उसे आर्थिक लाभ भी मिला।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि पदरान ने सैन्य प्रतिष्ठानों और उनसे जुड़े कर्मचारियों की जानकारी विदेशी खुफिया एजेंसियों तक पहुंचाई थी। जांच के दौरान उसके पास से कथित तौर पर कुछ संवेदनशील दस्तावेज और तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए।

मोसाद से संपर्क का दावा

ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, पदरान ने पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA से संपर्क करने की कोशिश की थी। जवाब नहीं मिलने के बाद उसने कथित तौर पर मोसाद से संपर्क किया। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद उसने ऑनलाइन माध्यमों से इजरायली एजेंसी को जानकारी भेजना शुरू किया।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि उसे खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी उपकरण और भुगतान उपलब्ध कराया गया था। हालांकि, इन आरोपों से संबंधित स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा

ईरानी न्यायपालिका के मुताबिक, पदरान को जासूसी और इजरायल के साथ खुफिया सहयोग के आरोपों में दोषी ठहराया गया। इसके बाद उसकी मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी और फिर उसे फांसी दी गई।

ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह कार्रवाई सामने आई है। हाल के संघर्ष के दौरान ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोपों में कई लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।

आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

पदरान के मामले में सामने आई अधिकांश जानकारी ईरानी न्यायपालिका और सरकारी मीडिया के बयानों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में लगाए गए आरोपों और कथित तौर पर दी गई सैन्य जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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