रियाद: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव अब क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है। शुक्रवार देर रात और शनिवार तड़के सऊदी अरब के कई इलाकों में हवाई खतरे को लेकर आपात अलर्ट जारी किए गए। राजधानी रियाद में विस्फोट की आवाज भी सुनी गई, हालांकि अधिकारियों ने किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं की है।
रियाद में जारी हुआ हवाई खतरे का अलर्ट
सऊदी सिविल डिफेंस ने शनिवार तड़के रियाद और अल-खर्ज समेत कुछ इलाकों में संभावित हवाई खतरे की चेतावनी जारी की। लोगों को घरों के अंदर रहने, खिड़कियों और खुले इलाकों से दूर रहने तथा आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया।
रियाद में कम से कम एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी। बाद में अलर्ट हटा लिया गया। सऊदी अधिकारियों ने ये स्पष्ट नहीं किया कि खतरा किस दिशा से आया था या विस्फोट किस वजह से हुआ। हालांकि, हाल के दिनों में सऊदी अरब ने हूतियों की ओर से भेजे गए ड्रोन और मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी है।
हूती हमलों पर UNSC की सख्त प्रतिक्रिया
बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने यमन के हूतियों की सैन्य गतिविधियों, सऊदी अरब पर हमलों और व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाओं की निंदा की है।
UNSC ने चेतावनी दी कि लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां संघर्ष को और फैलाने के साथ समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। परिषद ने यमन में शांति स्थापित करने की कोशिशों और वहां की गंभीर मानवीय स्थिति पर भी चिंता जताई।
सुरक्षा परिषद ने सभी देशों से हूतियों तक हथियार, सैन्य प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता पहुंचने से रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध को लागू करने का आह्वान किया है।
लाल सागर और तेल सप्लाई पर भी असर
सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में भी कमी देखी गई है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये संकट?
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से जुड़ा है। लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों में लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर तेल की कीमतों, माल ढुलाई लागत और आयात-निर्यात पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल क्षेत्र की स्थिति तेजी से बदल रही है। सऊदी अरब में जारी सुरक्षा अलर्ट, हूती हमलों और समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि संघर्ष आगे किस दिशा में जाता है।






























