महाराष्ट्रमुंबई

Bombay HC MP MLA Cases: बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश; एमपी-एमएलए के लंबित केसों का पूरा ब्योरा दो, ट्रायल स्टेज और गवाहों की संख्या बताओ!

Bombay HC MP MLA Cases: बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश; एमपी-एमएलए के लंबित केसों का पूरा ब्योरा दो, ट्रायल स्टेज और गवाहों की संख्या बताओ!

Bombay HC MP MLA Cases: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एमपी और एमएलए के खिलाफ लंबित मुकदमों का पूरा ब्योरा देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस एन जे जमर की विशेष बेंच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्वत: संज्ञान वाली पीआईएल पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान या पूर्व विधायकों के खिलाफ चल रहे केसों को जल्द निपटाने के लिए राज्य को ट्रायल का स्टेज और अभियोजकों की संख्या बतानी होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट एमपी एमएलए केस के इस फैसले से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या राज्य में एमपी-एमएलए से जुड़े केस सुनने वाले सभी कोर्ट काम कर रहे हैं। राज्य की वकील ने हामी भरी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गोवा और दादरा-नगर हवेली यूनियन टेरिटरी में लंबित केसों का विवरण चार हफ्तों में दिया जाएगा। इसमें प्रत्येक केस में कुल गवाहों की संख्या, परीक्षित गवाह, ट्रायल का मौजूदा स्टेज और आरोपी की पेशी सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन एजेंसी के कदम शामिल होंगे। जहां समन सर्व न हो सके, उसके बारे में भी जानकारी मांगी गई।

कोर्ट को यह आश्वासन भी मिला कि संबंधित कोर्टों में विधायकों के केस संभालने वाले पब्लिक प्रॉसीक्यूटर्स (पीपी) और एडिशनल पीपी (एपीपी) की संख्या का डिटेल दिया जाएगा। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट रजिस्ट्री को ट्रायल कोर्टों से डेटा मांगने की जरूरत नहीं। राज्य सरकार खुद अभियोजन एजेंसियों से डिटेल इकट्ठा करे। लंबित मुकदमे विवरण में अभियोजकों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई। सुप्रीम कोर्ट निर्देश के तहत ये केस तेजी से निपटाने हैं।

दो हफ्ते बाद कोर्ट कोविड-19 महामारी के दौरान राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कुछ केसों की वापसी की अंतरिम याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इसमें शिकायतकर्ताओं के नाम, आरोप और कोर्ट की मंजूरी से केस वापसी का सरकारी रेजोल्यूशन (जीआर) का डिटेल मांगा गया। विधायकों के ट्रायल स्टेज को लेकर कोर्ट सख्ती बरत रही है। राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि जानकारी समय पर दें।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उपजा है, जो एमपी-एमएलए के खिलाफ लंबे समय से चल रहे केसों को खत्म करने पर जोर देता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य से विधायकों के ट्रायल स्टेज का साफ ब्योरा मांगा है। इससे न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

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