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Coaching Classes Regulation Draft: कोचिंग क्लासेस पर लगेगी लगाम, महाराष्ट्र सरकार का ड्राफ्ट बिल तैयार!

Coaching Classes Regulation Draft: कोचिंग क्लासेस पर लगेगी लगाम, महाराष्ट्र सरकार का ड्राफ्ट बिल तैयार!

Coaching Classes Regulation Draft: बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि कोचिंग क्लासेस को रेगुलेट करने का ड्राफ्ट बिल तैयार हो चुका है। यह खबर सुनते ही आज की युवा पीढ़ी के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर यह बिल उनके लिए क्या बदलाव लाएगा। सरकार ने कोर्ट को यह भी कहा कि इस बिल को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। यह कदम कोचिंग क्लासेस की मनमानी पर लगाम लगाने और पढ़ाई के नाम पर हो रही कमर्शियलाइजेशन को रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आइए, इस पूरी कहानी को आसान शब्दों में समझते हैं।

यह सब तब शुरू हुआ, जब 1999 में एक एनजीओ, फोरम फॉर फेयरनेस इन एजुकेशन, ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र में कोचिंग क्लासेस बिना किसी नियम-कायदे के चल रही हैं। कई कोचिंग सेंटर्स में तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, जैसे साफ पानी, शौचालय या ठीक से बैठने की जगह। उस वक्त कोर्ट में यह बात उठी कि इन कोचिंग क्लासेस को रेगुलेट करने की सख्त जरूरत है। सरकार ने 2000 में इसके लिए एक ऑर्डिनेंस भी लाया था, लेकिन वह कानून नहीं बन पाया और खत्म हो गया। अब, 25 साल बाद, यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में है। कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि इतना समय बीत जाने के बाद भी यह नीति कब तक तैयार होगी।

कोर्ट में चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एमएस करनिक की बेंच ने सरकार से साफ-साफ पूछा कि यह पॉलिसी कब बनेगी। उन्होंने कहा कि 1999 से यह मामला चल रहा है और अब 2025 आ गया है। कोर्ट का यह सवाल आज की युवा पीढ़ी के लिए भी मायने रखता है, क्योंकि कोचिंग सेंटर्स की पढ़ाई आज उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है। सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लेडर विशाल ठदानी ने बताया कि ड्राफ्ट बिल तैयार है और इसे जुलाई में होने वाले मानसून सत्र में विधानसभा में लाया जाएगा। यह सुनकर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए तय की।

इस ड्राफ्ट बिल की कहानी में एक और अहम मोड़ है। 16 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार ने कोचिंग क्लासेस को रेगुलेट करने के लिए गाइडलाइंस जारी की थीं। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे अपने यहां इसके लिए नियम बनाएं। महाराष्ट्र सरकार ने भी इसी दिशा में कदम उठाया। सरकार ने शिक्षा आयुक्त को केंद्र की गाइडलाइंस का अध्ययन करने और एक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। यह ड्राफ्ट बिल (Coaching Classes Regulation Draft) उसी का नतीजा है। आज का युवा, जो कोचिंग सेंटर्स पर निर्भर है, यह जानना चाहता है कि यह बिल उनके लिए क्या बदलाव लाएगा।

1999 की याचिका में कुछ गंभीर बातें सामने आई थीं। उस वक्त कहा गया था कि कई सरकारी स्कूलों के शिक्षक कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाते हैं। वे स्कूल में अपनी ड्यूटी से ज्यादा ध्यान कोचिंग के छात्रों को देते हैं। इससे स्कूल की पढ़ाई कमजोर होती है और छात्रों को मजबूरी में कोचिंग की ओर जाना पड़ता है। साथ ही, कोचिंग सेंटर्स की कमर्शियलाइजेशन की शिकायत भी थी। मोटी फीस लेकर ये सेंटर्स बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन कई बार नतीजे नहीं मिलते। यह बात आज भी सच है। आज की पीढ़ी के लिए यह बिल इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह कोचिंग सेंटर्स की जवाबदेही तय कर सकता है।

कोर्ट में यह बात भी उठी कि कोचिंग सेंटर्स में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई जगह छात्रों को ठीक से बैठने की जगह तक नहीं मिलती। सरकार का यह ड्राफ्ट बिल इन कमियों को दूर करने की कोशिश है। यह बिल कोचिंग सेंटर्स को रजिस्टर करने, उनकी फीस पर नजर रखने और सुविधाओं को बेहतर करने की बात कर सकता है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बिल में क्या-क्या नियम होंगे। लेकिन इतना तय है कि यह युवाओं और उनके परिवारों के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है। कोर्ट ने भी सरकार से कहा कि अब और देर नहीं होनी चाहिए।

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