Constitution Debate in Lok Sabha: लोकसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान बिहार के जेडीयू सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने शुक्रवार को जो तेवर दिखाए, उसने संसद का माहौल गर्मा दिया। उनकी बातें, जो सीधे तौर पर कांग्रेस की राजनीति और उसके पुराने फैसलों पर सवाल उठाती थीं, ने सभी को चौंका दिया।
ललन सिंह ने अपने भाषण में कांग्रेस की सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संविधान की बात करने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने बार-बार संविधान की मर्यादा को तार-तार किया। उन्होंने साफ कहा कि “संविधान चर्चा” (Constitution Debate) का मकसद तभी पूरा होगा, जब इतिहास के पन्नों को पलटकर सच को सामने रखा जाए।
कांग्रेस राज में संविधान का दुरुपयोग
ललन सिंह ने चर्चा को इतिहास की तरफ मोड़ते हुए पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सरकारों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों को गिराया गया। उदाहरण के लिए, उन्होंने 2005 के बिहार संकट का जिक्र किया। उस वक्त मनमोहन सिंह सरकार ने रातों-रात राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था।
उन्होंने कहा, “रात के अंधेरे में, जब देश सो रहा था, तब बिहार की सरकार को गिराने की साजिश रची गई। सुबह का सूरज उगा और बिहार में राष्ट्रपति शासन लग चुका था। ये है कांग्रेस की राजनीति का असली चेहरा।” यह बयान उस समय की राजनीति पर गहरा कटाक्ष था।
आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय
ललन सिंह ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 1975 में रात के समय 12 कैबिनेट मंत्रियों को बुलाया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर लोकतंत्र का गला घोंट दिया। उन्होंने इसे संविधान का सबसे बड़ा अपमान बताया। यह कहानी सुनाते हुए उनके शब्द, “संविधान और राजनीति का सच” (Truth of Constitution and Politics) की गहराई को दिखा रहे थे।
प्रियंका गांधी पर चुटकी
प्रियंका गांधी वाड्रा के पहले लोकसभा भाषण का भी ललन सिंह ने मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “जो खुद संविधान को बार-बार तोड़ने की राजनीति करते रहे हैं, आज वही संविधान बचाने की बात कर रहे हैं। यह बात सोचने वाली है।” प्रियंका के भाषण पर उनकी प्रतिक्रिया ने चर्चा में एक नया मोड़ ला दिया।
इंडिया गठबंधन पर निशाना
विपक्षी दलों के गठबंधन पर बात करते हुए ललन सिंह ने सीधे-सीधे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जाति जनगणना का मुद्दा उठाने वाले अखिलेश यादव ने अपने मुंह पर टेप चिपका रखा था, जब इस पर कोई प्रस्ताव लाया गया। यह दोहरी राजनीति की मिसाल है।”
मोदी सरकार की सोच
ललन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को संविधान से जोड़ते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास” नारा भारतीय संविधान के मूल मंत्र से निकला हुआ है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि वे लोकतंत्र के लिए काम करें, न कि उसे तोड़ने के लिए।
लोकसभा में हुई इस चर्चा ने दिखा दिया कि राजनीति में इतिहास को भूलना असंभव है। खासकर जब वह इतिहास संविधान और लोकतंत्र से जुड़ा हो।
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