मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा से सामने आई एक हैरान करने वाली कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। यहां 16 साल का इकबाल शेख पिछले करीब पांच सालों से अपना ज्यादातर समय तालाब के पानी में बिताता है। हैरानी की बात ये है कि वो कभी-कभी लगातार चार-पांच दिन और कई बार करीब सात दिनों तक पानी में रहने का दावा करता है।
इकबाल के मुताबिक, पानी से बाहर निकलते ही उसके शरीर में तेज जलन और बेचैनी होने लगती है। वहीं, तालाब के पानी में जाने के बाद उसे राहत महसूस होती है। यही वजह बताई जा रही है कि करीब 11 साल की उम्र से उसका तालाब में रहने का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे पानी ही उसका ठिकाना बन गया।
पानी में रहने से मिलती है राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, इकबाल बेलडांगा के अलग-अलग तालाबों में कई-कई दिनों तक रहता है। उसके लिए ये कोई करतब या रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं है। वो इसे अपनी शारीरिक परेशानी से जोड़कर देखता है।
इकबाल का कहना है कि जब वो पानी से बाहर आता है तो शरीर में जलन बढ़ जाती है, जबकि पानी में जाने के बाद उसे राहत मिलती है। हालांकि, उसकी इस परेशानी की वास्तविक वजह क्या है, इसका अभी तक कोई चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
11 साल की उम्र में घर से दूर हो गया
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले इकबाल ने घर से बाहर ज्यादा समय बिताना शुरू किया था। धीरे-धीरे तालाब उसके रहने की जगह बन गया। आज स्थिति ये है कि वो सामान्य जीवन से अलग कई-कई दिनों तक पानी में ही रहना पसंद करता है।
उसकी उम्र के बच्चे जहां स्कूल, पढ़ाई और खेलकूद में समय बिताते हैं, वहीं इकबाल का काफी समय तालाब में गुजरता है। इस असामान्य स्थिति ने स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।
जिन्न या अदृश्य शक्ति का दावा, लेकिन पुष्टि नहीं
इकबाल अपनी परेशानी को एक अलग तरीके से समझाता है। उसका दावा है कि उसके ऊपर किसी जिन्न, परी या अदृश्य शक्ति का प्रभाव है और इसी वजह से उसके शरीर में जलन होती है। हालांकि, इस दावे की कोई स्वतंत्र या चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञ जांच के बिना इस तरह के दावे को बीमारी का कारण मानना उचित नहीं होगा। उसकी स्थिति को समझने के लिए विस्तृत मेडिकल जांच जरूरी है।
लगातार पानी में रहने से शरीर पर दिखने लगा असर
लंबे समय तक पानी में रहने का असर अब इकबाल के शरीर पर भी दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उसके हाथ-पैर और शरीर की त्वचा काफी सफेद पड़ गई है। इसके अलावा उसे सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां भी होने लगी हैं।
यानी जिस पानी में उसे तत्काल राहत महसूस होती है, लंबे समय तक उसी में रहना उसके स्वास्थ्य के लिए दूसरी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके बावजूद वो ज्यादा देर तक पानी से बाहर रहने में असहज महसूस करता है और दोबारा तालाब में चला जाता है।
इलाज कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ
इकबाल को स्थानीय लोगों की सलाह पर इलाज के लिए ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी ले जाया गया था। हालांकि, उसके मुताबिक वहां से ऐसी मदद नहीं मिल सकी जिससे उसकी परेशानी खत्म हो सके।
उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। ऐसे में बड़े निजी अस्पताल में लंबे समय तक इलाज कराना परिवार के लिए आसान नहीं है। यही वजह है कि मेडिकल समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश के बावजूद इकबाल वापस तालाब में रहने लगता है।
तालाब के किनारे पहुंच रहे लोग
इकबाल की कहानी फैलने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग उसे देखने तालाब के किनारे पहुंच रहे हैं। स्कूली बच्चे भी उसे देखने आते हैं। कई स्थानीय लोग अपनी तरफ से उसकी मदद करने की कोशिश करते हैं और उसे बिस्किट, चिउड़ा तथा अन्य खाने-पीने की चीजें देते हैं।
हालांकि, लोगों की मदद से उसकी तत्काल जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन उसकी मूल समस्या का समाधान अभी भी नहीं हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल- आखिर बीमारी क्या है?
इकबाल की कहानी कई सवाल खड़े करती है। पानी से बाहर निकलने पर उसे इतनी तेज जलन क्यों होती है? क्या ये त्वचा से जुड़ी किसी समस्या का संकेत है? क्या ठंडे पानी के संपर्क से उसे अस्थायी राहत मिलती है? या इसके पीछे कोई दूसरी चिकित्सकीय वजह है?
इन सवालों का जवाब केवल उचित मेडिकल जांच के बाद ही मिल सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी परेशानी का निश्चित कारण सामने नहीं आया है।
16 साल की उम्र में किसी किशोर का लगातार कई दिनों तक तालाब में रहना सामान्य स्थिति नहीं है। इसलिए इकबाल को सिर्फ कौतूहल या वायरल कहानी के रूप में देखने के बजाय उसकी चिकित्सकीय और सामाजिक जरूरतों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। स्थानीय लोगों की भी यही मांग है कि उसकी विस्तृत जांच हो और ऐसी चिकित्सा सहायता मिले, जिससे उसे तालाब में रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।



















