Mumbai Airport के टर्मिनल-1 (T1) के पुनर्विकास को लेकर एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइंस के बीच मतभेद सामने आए हैं। विवाद का मुख्य मुद्दा कुछ उड़ानों को अस्थायी रूप से नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) पर शिफ्ट करना और T1 के पुराने हिस्सों का चरणबद्ध पुनर्विकास है।
मामले को सुलझाने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में दिल्ली में एयरलाइंस और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में उड़ानों के संचालन और T1 के पुनर्विकास को लेकर व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश होगी।
क्यों हो रहा है विवाद?
T1 का निर्माण अलग-अलग समय में हुआ है। इसका T1B हिस्सा 1965 में, T1A 1992 में और T1C 2010 में तैयार हुआ था। एयरपोर्ट ऑपरेटर का कहना है कि पुराने ढांचे की सुरक्षा को देखते हुए इसके उत्तरी हिस्से का चरणबद्ध तरीके से पुनर्विकास जरूरी है।
प्रस्ताव के मुताबिक, कुछ परिचालन को मुंबई एयरपोर्ट के T2 और Navi Mumbai Airport की ओर स्थानांतरित किया जा सकता है। वहीं, कई एयरलाइंस का तर्क है कि एक ही शहर में दो एयरपोर्ट के बीच संचालन बांटने से कर्मचारियों, ग्राउंड स्टाफ और यात्रियों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
जनवरी 2027 से शुरू हो सकता है काम
अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) के अनुसार, T1 का पुनर्विकास जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना है। पुनर्विकास के बाद टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता करीब 1.5 करोड़ से बढ़कर 2 करोड़ होने की उम्मीद है।
ऑपरेटर का कहना है कि पुनर्विकास के दौरान Mumbai Airport के कुल यात्री यातायात का बड़ा हिस्सा प्रभावित नहीं होगा। सीमित संख्या में उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से समायोजित करने के लिए एयरलाइंस को नवी मुंबई एयरपोर्ट का विकल्प दिया गया है।
एयरलाइंस ने जताई आपत्ति
एयरलाइंस की ओर से उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट पर स्थानांतरित करने को लेकर चिंता जताई गई है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
एयरलाइंस का कहना है कि मुंबई में मौजूदा ग्राउंड स्टाफ और अन्य संसाधनों को दो एयरपोर्ट के बीच बांटने से संचालन जटिल हो सकता है। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों और एयरलाइन कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पुराने ढांचे की सुरक्षा भी मुद्दा
T1 की संरचनात्मक स्थिति को लेकर चिंताएं नई नहीं हैं। पहले किए गए निरीक्षणों में टर्मिनल के कुछ हिस्सों में जंग, कंक्रीट के क्षतिग्रस्त होने और सरिया दिखाई देने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर पुराने हिस्से के पुनर्विकास की जरूरत बताई गई थी।
अब प्रस्तावित बैठक में एयरलाइंस, MIAL और संबंधित अधिकारियों के बीच यात्री सुविधा, उड़ानों का संचालन, सुरक्षा और नवी मुंबई एयरपोर्ट पर संभावित शिफ्टिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसका फैसला आने वाले समय में मुंबई के हवाई यातायात और दोनों एयरपोर्ट के संचालन पर असर डाल सकता है।
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