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Rahul Gandhi vs Om Birla: पता नहीं क्या सोच है; स्पीकर ओम बिरला ने ऐसा क्या कहा कि फायर हुए राहुल गांधी

Rahul Gandhi vs Om Birla: पता नहीं क्या सोच है; स्पीकर ओम बिरला ने ऐसा क्या कहा कि फायर हुए राहुल गांधी

Rahul Gandhi vs Om Birla: संसद का माहौल इन दिनों कुछ अलग ही रंग लिए हुए है। 26 मार्च 2025 को लोकसभा में एक बार फिर से हंगामा देखने को मिला, और इस बार मामला नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच की तनातनी का रहा। ये कहानी तब शुरू हुई, जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। दूसरी ओर, ओम बिरला ने उनकी शिकायत पर जवाब देते हुए कुछ ऐसा कहा, जिसने आग में घी डालने का काम किया। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को करीब से समझते हैं।

सुबह से ही लोकसभा में माहौल गर्म था। शून्यकाल के बाद ओम बिरला ने राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष से ये उम्मीद की जाती है कि वो सदन की गरिमा और नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि कई बार सदस्यों का व्यवहार सदन की मर्यादा के खिलाफ देखा गया है। ओम बिरला ने ये भी जोड़ा कि सदन में पिता-बेटी, माँ-बेटी और पति-पत्नी जैसे रिश्ते भी सांसद के तौर पर मौजूद हैं, इसलिए सभी को नियम 349 के मुताबिक चलना चाहिए। ये सुनते ही राहुल गांधी का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने तुरंत खड़े होकर जवाब देना चाहा, लेकिन इससे पहले ही ओम बिरला ने कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया और बाहर चले गए।

इसके बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बात की। उनकी आवाज़ में नाराज़गी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने उनके बारे में कुछ टिप्पणी की, और जब वो इसका जवाब देने खड़े हुए, तो उन्हें मौका ही नहीं दिया गया। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ये भी दावा किया कि पिछले सात-आठ दिनों से वो चुपचाप बैठे हैं और कुछ नहीं बोले, फिर भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनके शब्दों में एक सवाल बार-बार गूंज रहा था—लोकसभा अध्यक्ष की सोच क्या है (What is the mindset of the Lok Sabha Speaker)? उन्होंने कहा कि सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है, और विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है।

राहुल गांधी अकेले नहीं थे। कांग्रेस के सांसदों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। कार्यवाही स्थगित होने के बाद वो ओम बिरला से मिलने गए और अपनी नाराज़गी जताई। कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का हक नहीं दिया जा रहा, जबकि ये संसद की पुरानी परंपरा रही है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उनके सांसद या मंत्री खड़े होते हैं, तो उन्हें तुरंत बोलने की इजाज़त मिल जाती है। गौरव गोगोई ने पुराने दिनों को याद करते हुए सुषमा स्वराज का ज़िक्र किया, जब वो नेता प्रतिपक्ष थीं और उन्हें पूरा सम्मान मिलता था। उनका कहना था कि आज ऐसा सम्मान विपक्ष को नहीं मिल रहा।

इस मुलाकात में कांग्रेस ने ओम बिरला से साफ जवाब माँगा, लेकिन गोगोई के मुताबिक उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि सदन में जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश हो रही है। गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि संसद चले, लेकिन जिस तरह से चीज़ें हो रही हैं, वो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं। राहुल गांधी ने भी यही बात दोहराई कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जगह होती है, लेकिन यहाँ ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

ये पूरा वाकया सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। लोग राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बयान और ओम बिरला की टिप्पणी पर अपनी-अपनी राय दे रहे थे। कोई इसे विपक्ष की नाटकबाज़ी बता रहा था, तो कोई लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा था। इस बहस ने नई पीढ़ी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर संसद में क्या हो रहा है। आज का युवा, जो हर खबर को अपने फोन पर देखता है, वो ये समझना चाहता है कि लोकतंत्र की ये लड़ाई किस दिशा में जा रही है।

लोकसभा अध्यक्ष की सोच क्या है (What is the mindset of the Lok Sabha Speaker)? ये सवाल सिर्फ राहुल गांधी का नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों का है, जो संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत मानते हैं। इस घटना ने एक बार फिर से ये दिखाया कि संसद सिर्फ कानून बनाने की जगह नहीं, बल्कि भावनाओं और विचारों का अखाड़ा भी है। यहाँ हर शब्द मायने रखता है, और हर मौका अहम होता है।


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