सांसदों की शपथ के नियमों में बदलाव: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों के शपथ के नियमों में बदलाव किया है। अब शपथ के बाद सांसद कोई नारा नहीं लगा सकेंगे। यह बदलाव 3 जुलाई को किया गया, जब कुछ सांसदों के नारे लगाने पर विवाद हुआ था।
नए नियम
नए नियम के तहत, सांसद अब शपथ ग्रहण के दौरान केवल शपथ लेंगे और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। वे शपथ के दौरान किसी भी प्रकार के नारे या टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि संसद में अनुशासन बना रहे और किसी भी तरह के राजनीतिक संदेशों से बचा जा सके।
18वीं लोकसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन, AIMIM के सांसद ओवैसी ने शपथ के बाद “जय फिलिस्तीन” का नारा लगाया था। इसके बाद अन्य सांसदों ने भी अलग-अलग नारे लगाए थे। राहुल गांधी ने “जय हिन्द” और “जय संविधान” कहा, जबकि भाजपा सांसद छत्रपाल गंगवार ने “जय हिंदू राष्ट्र” का नारा लगाया। इस प्रकार के नारों को लेकर संसद में बहस छिड़ गई थी।
नारों पर विवाद
- ओवैसी का “जय फिलिस्तीन” नारा: सबसे अधिक विवाद ओवैसी के नारे को लेकर हुआ। NDA सांसदों ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे नियमों के खिलाफ बताया। इसके बाद सभापति ने ओवैसी के नारे को रिकॉर्ड से हटा दिया।
- अन्य सांसदों के नारे: राहुल गांधी, छत्रपाल गंगवार, अवधेश राय और हेमा मालिनी ने भी शपथ के दौरान विभिन्न नारे लगाए थे, जिससे संसद में हंगामा हुआ।
सांसदों की प्रतिक्रिया
- असदुद्दीन ओवैसी: ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने केवल अपने विचार व्यक्त किए हैं और हाशिए पर पड़े लोगों के मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य सदस्य भी अलग-अलग बातें कह रहे हैं, इसलिए उनका “जय फिलिस्तीन” कहना गलत नहीं है।
- केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद: केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और किरेन रिजिजू ने ओवैसी के नारे को गलत बताया और कहा कि शपथ के दौरान किसी दूसरे देश की प्रशंसा करना उचित नहीं है।
नए नियमों के तहत सांसदों के शपथ ग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार के नारे लगाने पर रोक लगा दी गई है। यह बदलाव संसद में अनुशासन बनाए रखने और राजनीतिक संदेशों से बचने के लिए किया गया है। अब सांसद केवल शपथ लेंगे और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे संसद की गरिमा बनी रहेगी।
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