Rajya Sabha elections: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछा दी है। मंगलवार को पार्टी ने 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए अपने 9 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का है, जिन्हें बिहार से उम्मीदवार बनाया गया है।
बिहार में ‘संगठन’ पर भरोसा
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा ने अपने कोटे की 2 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट कर दिए हैं:
- नितिन नवीन: वर्तमान में बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन को राज्यसभा भेजने का निर्णय लेकर पार्टी ने उनके कद को और बढ़ाया है। गौरतलब है कि जनवरी में ही वे भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे।
- शिवेश कुमार: संगठन में गहरी पैठ रखने वाले बिहार प्रदेश महामंत्री शिवेश कुमार को भी पार्टी ने उच्च सदन के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है।
The Central Election Committee of Bharatiya Janata Party has given its approval on the following names for the bi-annual elections of the Rajya Sabha in various states. #BharatiyaJanataParty pic.twitter.com/cRmM6QtQZw
— GVL Narasimha Rao (@GVLNRAO) March 3, 2026
नए चेहरों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता
भाजपा की इस पहली लिस्ट की सबसे बड़ी विशेषता ‘नए चेहरों’ को मौका देना है।
- 9 में से 8 प्रत्याशी बिल्कुल नए हैं।
- इनमें से 5 उम्मीदवार ऐसे हैं जो लंबे समय से पार्टी के सांगठनिक ढांचे (Organization) से जुड़े रहे हैं।
यह कदम स्पष्ट करता है कि भाजपा आगामी चुनावों से पहले अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती है कि निष्ठा और मेहनत का इनाम जरूर मिलता है।
चुनावी कार्यक्रम पर एक नजर
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्यसभा की इन सीटों के लिए प्रक्रिया अब तेज हो गई है:
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| नामांकन की अंतिम तिथि | 05 मार्च |
| मतदान की तिथि | 16 मार्च |
| मतगणना (Result) | 16 मार्च (शाम) |
क्या है भाजपा की रणनीति?
इस सूची के जरिए भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष को बिहार से उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में अपनी पकड़ और प्राथमिकता को दर्शाया है। वहीं, 8 नए चेहरों को आगे कर पार्टी ने ‘पार्लियामेंट्री बोर्ड’ के उस विजन को दोहराया है जिसमें परिवारवाद के बजाय संगठन के समर्पित चेहरों को तरजीह दी जाती है।






























