Israel-Iran war: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अपने चौथे दिन और भी विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को अमेरिकी और इजराइली वायुसेना ने ईरान के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर यह साफ कर दिया है कि यह जंग अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के सत्ता केंद्र (Regime) को हिलाने की सीधी कोशिश है।
Geolocation of the building struck today in this video in the Iranian city of Qom. 34.62534, 50.87639
The building belongs to the “Assembly of Religious Experts” who select the next Islamic Revolutions’ Supreme Leader.https://t.co/nH9hNR5Tou pic.twitter.com/TgUGCYmmhv— Mehdi H. (@mhmiranusa) March 3, 2026
कोम और तेहरान में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा?
मंगलवार की सबसे बड़ी खबर ईरान के पवित्र शहर कोम से आई, जहाँ अमेरिकी-इजराइली जेट्स ने मजलिस-ए-खोबरेगॉन (Assembly of Experts) की इमारत को पूरी तरह तबाह कर दिया।
- रणनीतिक महत्व: यह वही स्थान है जहाँ 88 शीर्ष धर्मगुरु आयतुल्लाह खामेनेई के उत्तराधिकारी (अगले सुप्रीम लीडर) को चुनने के लिए जुटने वाले थे।
- नुकसान: गनीमत रही कि हमले के वक्त इमारत खाली थी, हालांकि कुछ अपुष्ट खबरें कुछ धर्मगुरुओं के हताहत होने का दावा कर रही हैं।
- तेहरान पर प्रहार: इससे पहले सोमवार रात मजमा-ए-मसलाहत-ए-निजाम (Expediency Discernment Council) की इमारत को भी मलबे में तब्दील कर दिया गया। ये हमले स्पष्ट संदेश हैं कि अमेरिका और इजराइल, ईरान को नया सुप्रीम लीडर चुनने का मौका नहीं देना चाहते।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: “वार्ता के लिए अब बहुत देर हो चुकी”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। उनके बयान के मुख्य बिंदु:
- प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक: ट्रंप ने खुलासा किया कि खुफिया जानकारी मिली थी कि ईरान हमला करने वाला है, इसलिए अमेरिका ने पहले कदम उठाया।
- इजराइल का साथ: ट्रंप ने कहा, “इजराइल ने हमसे मदद नहीं मांगी थी, हम खुद उनके साथ खड़े हैं क्योंकि हमारे लक्ष्य साझा हैं।”
- नो डायलॉग: उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान के साथ बातचीत की खिड़की अब बंद हो चुकी है। अगला चरण ईरान के लिए और भी सख्त और दर्दनाक होगा।”
नेतन्याहू का आश्वासन: “यह अंतहीन युद्ध नहीं होगा”
जहाँ एक ओर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो जंग के और भीषण होने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध की अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई ‘बरसों तक चलने वाली अंतहीन जंग’ नहीं होगी, बल्कि एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई होगी जिसका लक्ष्य जल्द से जल्द हासिल किया जाएगा।
मौजूदा स्थिति का विश्लेषण
| क्षेत्र | कार्रवाई | प्रभाव |
|---|---|---|
| कोम (Qom) | मजलिस-ए-खोबरेगॉन पर हमला | नेतृत्व चयन की प्रक्रिया बाधित |
| तेहरान (Tehran) | परिषद की इमारत तबाह | प्रशासनिक ढांचे को भारी चोट |
| कूटनीतिक मोर्चा | ट्रंप का ‘No Talk’ स्टैंड | शांति की उम्मीदें धूमिल |
क्या खाड़ी देश ‘बड़े बदलाव’ की ओर हैं?
ईरान के भीतर धार्मिक और रणनीतिक इमारतों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अमेरिका और इजराइल का लक्ष्य केवल सैन्य ठिकानों को नष्ट करना नहीं, बल्कि ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था की नींव को हिलाना है। यदि ट्रंप प्रशासन के तेवर यही रहे, तो आने वाले दिन पूरे पश्चिम एशिया के भूगोल और राजनीति को हमेशा के लिए बदल सकते हैं।






























