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2026 Assembly Polls: 5 राज्यों की 824 सीटों पर ‘सुपरफास्ट’ चुनावी जंग, 4 मई को तय होगा भविष्य

2026 Assembly Polls
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2026 Assembly Polls: भारत के निर्वाचन आयोग ने देश के चार प्रमुख राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश की कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी शंखनाद कर दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को घोषणा की कि वोटिंग की प्रक्रिया 9 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच संपन्न होगी और 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

इतिहास का सबसे ‘तेज’ चुनाव: 21 दिन में फैसला
इस बार का चुनाव अपनी गति के कारण चर्चा में है। आयोग ने इस बार केवल 21 दिनों में मतदान प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम समय है।

दिग्गजों की साख
इस बार का चुनाव केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि कई क्षत्रपों के लिए अस्तित्व और वर्चस्व की लड़ाई है।

पश्चिम बंगाल: ममता का ‘चौका’ या विपक्ष का वार?
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। ‘दीदी’ के लिए यह चुनाव उनकी लोकप्रियता की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है, जहाँ उन्हें विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

तमिलनाडु: DMK का ‘हैट्रिक’ वाला सपना
तमिलनाडु की राजनीति में आमतौर पर सत्ता परिवर्तन का रिवाज रहा है, लेकिन डीएमके (DMK) इस बार लगातार दूसरी बार सत्ता में आकर इतिहास रचना चाहती है। क्षेत्रीय अस्मिता और विकास के मुद्दों पर यह चुनाव केंद्रित रहने वाला है।

केरल: लेफ्ट का किला बनाम कांग्रेस की साख
केरल में लेफ्ट गठबंधन (LDF) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के इरादे से मैदान में है। वहीं, कांग्रेस (UDF) के लिए यह ‘करो या मरो’ की स्थिति है, क्योंकि पार्टी के सबसे अधिक लोकसभा सांसद इसी राज्य से आते हैं। कांग्रेस यहाँ अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बेताब है।

असम और पुडुचेरी: NDA के सामने किला बचाने की चुनौती
  • असम: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन यहाँ लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए जोर-आजमाइश कर रहा है।
  • पुडुचेरी: केंद्रशासित प्रदेश में एनडीए दूसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है।

उपचुनावों का भी होगा शोर
मुख्य चुनावों के साथ-साथ देश के 6 राज्यों (महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा) की 8 रिक्त विधानसभा सीटों पर दो चरणों में उपचुनाव होंगे। ये उपचुनाव स्थानीय राजनीति के मिजाज को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

सुरक्षा और निष्पक्षता की चुनौती
इतने कम समय में चुनाव संपन्न कराना सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि तकनीक और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के जरिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे।

अप्रैल से शुरू होने वाली यह चुनावी दौड़ 4 मई को एक नए जनादेश के साथ थमेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा सरकारें अपना किला बचाने में सफल रहती हैं या जनता ‘परिवर्तन’ की नई इबारत लिखती है।

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