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संघ प्रमुख की हुंकार: ‘घुसपैठियों पर रखें पैनी नजर, रोजगार न दें’, जनसंख्या नीति और धर्मांतरण पर भी बड़ा बयान

संघ प्रमुख
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ढांचे को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। मथुरा में एक संबोधन के दौरान उन्होंने अवैध घुसपैठ को राष्ट्र के लिए एक गंभीर चुनौती बताया और नागरिकों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। भागवत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी अपनी ओर से सतर्क रहना होगा।

घुसपैठियों की पहचान और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान
संघ प्रमुख ने अवैध घुसपैठ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जनता से अपील की कि वे अपने आसपास के परिवेश पर कड़ी नजर रखें।

* सजग प्रहरी बने समाज: उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने पड़ोस में रहने वाले संदिग्ध और विदेशी घुसपैठियों की पहचान करनी चाहिए और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को देनी चाहिए।
* आर्थिक चोट जरूरी: भागवत ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इन अवैध प्रवासियों को स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार का रोजगार न मिले। उनका मानना है कि जब तक उन्हें आर्थिक शरण मिलती रहेगी, घुसपैठ की समस्या बनी रहेगी।

‘तीन-बच्चे की नीति’ और जनसांख्यिकीय संतुलन
जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए भागवत ने ‘तीन-बच्चे की नीति’ की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों और सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट जनसंख्या नीति समय की मांग है।

जबरन धर्मांतरण: कानून के साथ सामाजिक शक्ति भी जरूरी
धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए सरसंघचालक ने कहा कि किसी का भी जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह गलत है और इसे तुरंत बंद होना चाहिए।
सरकार इस पर कानून बना सकती है और उसे बनाना भी चाहिए, लेकिन केवल कानून से काम नहीं चलेगा। समाज को खुद जागरूक होकर अपने स्तर पर इसे रोकना होगा।” — मोहन भागवत

असम और बंगाल चुनाव: राजनीतिक तपिश बढ़ी
भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। इन राज्यों में अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी लगातार इन राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ मुखर रही है। संघ प्रमुख के इस बयान से चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण और तीखी बहस की संभावना बढ़ गई है।

सावधानी और सद्भाव का संदेश
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि जहाँ हमें घुसपैठियों के प्रति सख्त रहना है, वहीं यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारतीय नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। देश के असली नागरिकों की गरिमा और अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।

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