पश्चिम एशिया में शांति की तमाम कोशिशें और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे धरे के धरे रह गए हैं। ईरान ने न केवल ट्रंप की ‘सीजफायर डील’ को सिरे से खारिज कर दिया है, बल्कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर सीधा हमला बोलकर युद्ध को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। ईरानी सेना के कड़े रुख से साफ है कि अब कूटनीति के लिए जगह कम और बारूद के लिए मैदान बड़ा होता जा रहा है।
“ट्रंप भरोसेमंद नहीं, डील नहीं जंग होगी”: ईरान
ईरानी सेना की सेंट्रल कमान के कमांडर इब्राहीम जोल्फागारी ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर तीखा प्रहार किया है। जोल्फागारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रंप खुद ही डील की बातें कर रहे हैं और खुद ही खुश हो रहे हैं, जबकि हकीकत में ईरान किसी भी समझौते के मूड में नहीं है। ईरान का मानना है कि अमेरिका पर भरोसा करना मुमकिन नहीं है, इसलिए अब फैसला ‘जंग के मैदान’ में ही होगा।
अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य अड्डों पर ताबड़तोड़ हमले
ईरान ने अपनी बातों को जमीन पर उतारते हुए बुधवार को भीषण सैन्य कार्रवाई की:
* अब्राहम लिंकन पर हमला: अरब सागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत (Aircraft Carrier) ‘अब्राहम लिंकन’ को ईरानी सेना ने निशाना बनाया। यह सीधे तौर पर अमेरिका को युद्ध की चुनौती देने जैसा है।
* खाड़ी देशों में हाहाकार: ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एक के बाद एक कई मिसाइलें दागीं। पिछले तीन दिनों में यह पहली बार है जब ईरान ने इतनी आक्रामकता के साथ अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किया है।
इजराइल-ईरान: सीधी भिड़ंत और एयर स्ट्राइक
जंग की आग केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं है। ईरान और इजराइल एक-दूसरे के वजूद पर हमला कर रहे हैं:
* इजराइल पर प्रहार: ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के नेगेव और राजधानी तेल अवीव को दहला दिया है।
* ईरान के नेवल बेस पर बमबारी: जवाबी कार्रवाई में इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान और रणनीतिक शहर इस्फाहन पर जोरदार एयर स्ट्राइक की। सबसे बड़ी खबर बंदरअब्बास से है, जहां इजराइल ने ईरान के प्रमुख नेवल बेस (नौसेना अड्डे) को बमबारी कर भारी नुकसान पहुंचाया है।
* लेबनान का मोर्चा: इजराइल ने लेबनान में भी अपने हमले तेज कर दिए हैं, जिससे यह युद्ध अब बहुआयामी (Multi-front) होता जा रहा है।
क्या विश्व युद्ध की आहट है?
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही जिस शांति का दावा किया था, वह फिलहाल कोसों दूर नजर आ रही है। ईरान के कड़े तेवर और अमेरिकी युद्धपोत पर हमले ने पेंटागन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगर इजराइल और ईरान के बीच यह ‘डायरेक्ट वॉर’ और तेज हुई, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है। फिलहाल, पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी महाविनाश का कारण बन सकती है।
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