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तेल-गैस को लेकर अफवाहों पर सख्त हुई सरकार, आपत्तिजनक कंटेंट 1 घंटे में हटाने की तैयारी

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर फैल रही अफवाहों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी भ्रामक खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी को रोकने के लिए अब सरकार अलर्ट मोड में आ गई है।

अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम

सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाले आपत्तिजनक या भ्रामक कंटेंट को तेजी से हटाया जाएगा। इसके लिए कंटेंट हटाने की समयसीमा को घटाकर 3 घंटे से सिर्फ 1 घंटे करने की तैयारी की जा रही है। ये कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में तेल और गैस की कमी को लेकर अफवाहें तेजी से फैल रही हैं।

सोशल मीडिया पर निगरानी होगी और कड़ी

सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। अंतिम चर्चा के बाद जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इससे पहले भी फरवरी में कंटेंट हटाने के समय में बदलाव किया गया था, लेकिन अब हालात को देखते हुए इसे और सख्त किया जा रहा है।

क्यों बढ़ी चिंता?

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर अफवाहें फैलने लगी हैं। ये अफवाहें आम लोगों में घबराहट और अनावश्यक स्टॉकिंग की स्थिति पैदा कर सकती हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

जनता के लिए सलाह

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें। अफवाहों को आगे बढ़ाने से बचें और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें।

सरकार का ये कदम स्पष्ट करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली गलत जानकारी को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। तेजी से कार्रवाई के जरिए अफवाहों पर रोक लगाकर स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम जनता में भ्रम और डर का माहौल न बने।

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