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महायुद्ध के मुहाने पर दरार: नाटो को ‘नाकारा’ कह ट्रंप ने झाड़ा पल्ला, नए ईरानी सुप्रीम लीडर बोले— “हमें जमीनी जंग का इंतजार”

नाटो
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मध्य-पूर्व की रणभूमि में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) की नींव हिला दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ छिड़ी इस जंग में अपने ही सहयोगियों के बीच अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। इस कूटनीतिक विफलता के बाद ट्रंप के तीखे बयानों और ईरान के नए नेतृत्व की ललकार ने वैश्विक तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।

1. ट्रंप का नाटो पर प्रहार: “नाकारा संगठन को छोड़ देंगे”
ईरान युद्ध में नाटो देशों से अपेक्षित सैन्य मदद न मिलने पर राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नाटो को ‘नाकारा’ करार देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि अमेरिका इस गठबंधन से बाहर निकल सकता है। इस बयान के तुरंत बाद ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा— “ईरान मिशन अब पूरा हो गया है और हम जल्द ही वहां से अपनी सेनाएं वापस बुलाएंगे।” ट्रंप का दावा है कि ईरान ने घुटने टेकते हुए अमेरिका से युद्धविराम (Ceasefire) की गुहार लगाई है।

2. मुज्तबा खामेनेई की ललकार: “शहादत को तैयार हैं”
ट्रंप के युद्धविराम वाले दावे को ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने सिरे से खारिज कर दिया है। पिता अयातुल्ला खामेनेई के बाद सत्ता संभालने वाले मुज्तबा ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा— “ईरान को अमेरिका के साथ जमीनी जंग (Ground War) का बेसब्री से इंतजार है। हम पीठ दिखाकर भागने वाले नहीं, शहादत देने वाले लोग हैं।” ईरान के इस कड़े रुख से साफ है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है।

3. ब्रिटेन का ‘नो ट्रंप’ प्लान: 35 देशों की बड़ी बैठक
ट्रंप द्वारा नाटो छोड़ने की धमकी पर ब्रिटेन ने भी सख्त रुख अपनाया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टामर ने दो-टूक शब्दों में कहा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को खुलवाने के लिए उन्हें अब ट्रंप या अमेरिका की जरूरत नहीं है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक आपातकालीन बैठक बुला रहा है, जिसमें अमेरिका के बिना एक वैकल्पिक सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होगी।

4. गुरुवार सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन: टिकी हैं दुनिया की निगाहें
ईरान और नाटो के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस संबोधन में कोई बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान कर सकते हैं। क्या वे वास्तव में नाटो से अलग होने की घोषणा करेंगे या ईरान के खिलाफ किसी निर्णायक सैन्य कार्रवाई का अंतिम आदेश देंगे? पूरी दुनिया की सांसें इस वक्त वॉशिंगटन की ओर थमी हुई हैं।

ईरान युद्ध अब केवल दो देशों की जंग नहीं रहा, बल्कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने वैश्विक समीकरणों (नाटो) के अंत की शुरुआत जैसा नजर आ रहा है। अगर गुरुवार सुबह ट्रंप नाटो छोड़ने का ऐलान करते हैं, तो दुनिया की राजनीति और सुरक्षा का नक्शा हमेशा के लिए बदल जाएगा।

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