महाराष्ट्र

‘वायरल वीडियो’ की आग में झुलसे मंत्री नरहरि जिरवाल: कैबिनेट से बनाई दूरी, राकांपा (अजित) खेमे में मची खलबली!

नरहरि जिरवाल
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महाराष्ट्र की राजनीति में ‘वीडियो कांड’ ने एक बार फिर भूचाल ला दिया है। अन्न एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल अपने एक आपत्तिजनक वायरल वीडियो के चलते चौतरफा मुश्किलों में घिर गए हैं। विवाद इतना गहरा गया है कि बुधवार को आयोजित महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल की बैठक से जिरवाल ने पूरी तरह दूरी बनाए रखी। इस अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

कैबिनेट से दूरी और पार्टी नेतृत्व को सफाई
सूत्रों के मुताबिक, मंत्री नरहरि जिरवाल ने बुधवार सुबह ही अपनी पार्टी (राकांपा-अजित गुट) की मुखिया और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को सूचना दे दी थी कि वे कैबिनेट ब्रीफिंग और बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। जिरवाल ने न केवल अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दी, बल्कि वायरल वीडियो को लेकर अपनी सफाई भी पेश की है। उनका दावा है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है या उन्हें बदनाम करने की साजिश रची गई है, हालांकि विपक्ष इस मुद्दे पर हमलावर है।

सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री से गुप्त मुलाकात
जिरवाल मामले की गंभीरता को देखते हुए राकांपा (अजित) के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे तुरंत एक्शन में नजर आए। वे मंत्रालय पहुंचे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बंद कमरे में मुलाकात की। बताया जा रहा है कि तटकरे ने मुख्यमंत्री को सुनेत्रा पवार और जिरवाल के बीच हुई पूरी बातचीत का ब्योरा दिया और पार्टी का पक्ष रखा। सरकार इस मुद्दे पर किसी भी तरह की किरकिरी से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।

सुनेत्रा पवार की ‘इमर्जेंसी’ बैठक: जिरवाल रहे नदारद
मंत्रिमंडल की औपचारिक बैठक शुरू होने से ठीक पहले उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने अपने कोटे के मंत्रियों के साथ एक अलग बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में:
* छगन भुजबल, दत्तात्रय भरणे, अदिति तटकरे और हसन मुश्रीफ जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे।
* हैरानी की बात यह रही कि खुद की पार्टी की इस आंतरिक बैठक से भी नरहरि जिरवाल गायब रहे।
* बैठक में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि यदि विपक्ष इस मुद्दे को सदन या सार्वजनिक मंच पर उठाता है, तो पार्टी का आधिकारिक रुख क्या होगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा
खबर है कि इस विवाद के बाद सरकार के भीतर जिरवाल के इस्तीफे या उनके विभाग में बदलाव को लेकर भी दबी जुबान में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राकांपा (अजित) के लिए यह स्थिति काफी असहज है, क्योंकि पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर खुद को साबित करने की कोशिश कर रही है।

बड़ा सवाल: क्या नरहरि जिरवाल की सफाई मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी मुखिया को संतुष्ट कर पाएगी? या फिर इस वायरल वीडियो की कीमत उन्हें अपनी मंत्री पद की कुर्सी गंवाकर चुकानी होगी? फिलहाल, सबकी नजरें एसआईटी या पुलिस की अगली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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