महाराष्ट्र

राकांपा (अजित) में ‘डैमेज कंट्रोल’: सुनेत्रा पवार ने प्रफुल्ल पटेल के घर दी दस्तक, क्या थम जाएगा ‘लेटर वॉर’ का तूफान?

प्रफुल्ल पटेल
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महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार बनाम पवार’ की जंग के बाद अब अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भीतर ही अंदरूनी कलह की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। पार्टी प्रमुख और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के साथ अनबन की खबरों को सिरे से खारिज करने के लिए खुद कमान संभाली है। गुरुवार देर रात दिल्ली में हुई दोनों नेताओं की मुलाकात को पार्टी के भीतर एक बड़े ‘डैमेज कंट्रोल’ के रूप में देखा जा रहा है।

विवाद की जड़: वो ‘चिट्ठी’ जिसने बढ़ाई दूरियां
इस पूरे विवाद के केंद्र में सुनेत्रा पवार द्वारा 10 मार्च को केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजा गया एक पत्र है। सूत्रों के अनुसार, इस पत्र में कुछ ऐसी बातें लिखी गई थीं जिससे प्रफुल्ल पटेल और उनके समर्थक खेमे में गलतफहमियां पैदा हो गई थीं। इस पत्र के बाद से ही पटेल और पार्टी नेतृत्व के बीच संवाद की कमी देखी जा रही थी।

दिल्ली में बढ़ी हलचल: जब गायब दिखे दिग्गज
संसद के बजट सत्र के अंतिम दिन जब सुनेत्रा पवार दिल्ली पहुंचीं, तो पार्टी के दो सबसे कद्दावर चेहरे—प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुनील तटकरे—कहीं नजर नहीं आए। सदन और पार्टी की बैठकों से इन दिग्गजों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में ‘बगावत’ और ‘नाराजगी’ की चर्चाओं को हवा दे दी। मीडिया में यह खबर तेजी से फैल गई कि राकांपा (अजित) गुट में सब कुछ ठीक नहीं है।

मुलाकात और सुलह की कोशिश: “पार्टी में आप महत्वपूर्ण हैं”
अटकलों को बढ़ता देख सुनेत्रा पवार ने शाम को सीधे प्रफुल्ल पटेल के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। सूत्रों के हवाले से जो बातें सामने आई हैं, वे इस प्रकार हैं:
* गलतफहमियों का निवारण: सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र के संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट की और पटेल की शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया।
* अनुभव को सम्मान: उन्होंने पटेल को आश्वस्त किया कि पार्टी के निर्माण और भविष्य के निर्णयों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
* एकजुटता का संदेश: इस व्यक्तिगत मुलाकात के जरिए सुनेत्रा ने यह संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर कोई मतभेद नहीं है और सभी नेता एक साथ हैं।

आगे की चुनौती: वरिष्ठों को साथ लेकर चलने का संकल्प
सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया है कि वह वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को साथ लेकर पार्टी को आगे बढ़ाना चाहती हैं। हालांकि, राजनीति के जानकारों का मानना है कि केवल एक मुलाकात से दरारें नहीं भरतीं। 10 मार्च के पत्र के बाद जो अविश्वास पैदा हुआ है, उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए सुनेत्रा पवार और अजित पवार को आने वाले दिनों में और अधिक समावेशी कदम उठाने होंगे।

फिलहाल, इस ‘डिनर डिप्लोमेसी’ या व्यक्तिगत मुलाकात ने पार्टी के भीतर उठते तूफान को शांत कर दिया है, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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