महाराष्ट्र

बारामती उपचुनाव: अजित पवार के निधन के बाद महाविकास आघाडी में हलचल, क्या कांग्रेस के पाले में जाएगी ‘पवारों की पारंपरिक’ सीट?

बारामती
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मुंबई:महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र बिंदु ‘बारामती’ में एक बड़े युग के अंत के बाद अब सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनावों की आहट ने महाविकास आघाडी (MVA) के भीतर मंथन तेज कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राकांपा (शरद चंद्र पवार) के बीच सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत का दौर शुरू होने वाला है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस की दावेदारी को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।

बारामती और राहुरी पर कांग्रेस की नजर
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पावर सेंटर’ मानी जाने वाली बारामती सीट और राहुरी सीट पर होने वाले उपचुनावों के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है। पार्टी ने इन दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रारंभिक फैसला किया है। बारामती, जो दशकों से पवार परिवार का अभेद्य किला रही है, वहां कांग्रेस की दावेदारी एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रही है।

संजय राऊत का ‘प्लान MVA’: एकजुटता का संदेश
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और प्रवक्ता संजय राऊत ने साफ कर दिया है कि गठबंधन की प्राथमिकता एकजुट होकर चुनाव लड़ना है। राऊत के प्रमुख बयान इस प्रकार हैं:

* शरद पवार से चर्चा: बारामती को लेकर जल्द ही राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक की जाएगी।
* दावेदारी पर लचीला रुख: राऊत ने स्वीकार किया कि बारामती पारंपरिक रूप से शरद पवार गुट की सीट रही है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में शरद पवार गुट चुनाव नहीं लड़ता है, तो आपसी सहमति से कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन दिया जा सकता है।
* समर्थन के संकेत: यदि कांग्रेस बारामती और राहुरी दोनों सीटों पर मजबूती से उतरती है, तो शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन धर्म निभाते हुए अपना पूरा समर्थन देगी।

क्यों अहम है यह उपचुनाव?
अजित पवार के निधन के बाद बारामती में यह पहला चुनाव होगा। यह न केवल एक सीट का चुनाव है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता के बीच ‘पवार विरासत’ के भविष्य और महाविकास आघाडी की एकजुटता की अग्निपरीक्षा भी है।

* विरासत की जंग: क्या पवार परिवार का ही कोई सदस्य इस सीट को संभालेगा या कांग्रेस को यह मौका मिलेगा?
* MVA का भविष्य: विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होने वाले ये उपचुनाव गठबंधन की मजबूती और समन्वय का पैमाना साबित होंगे।
* विपक्ष की रणनीति: महायुति (सत्तारूढ़ गठबंधन) इस सहानुभूति की लहर और राजनीतिक शून्यता के बीच किसे मैदान में उतारती है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।

संजय राऊत के बयानों से स्पष्ट है कि शिवसेना (यूबीटी) ‘बड़े भाई’ की भूमिका में समन्वय बिठाने की कोशिश कर रही है। अगले कुछ दिनों में होने वाली शरद पवार और कांग्रेस नेतृत्व की बैठक यह तय कर देगी कि बारामती के चुनावी रण में महाविकास आघाडी का चेहरा कौन होगा। फिलहाल, बारामती की जनता अपने नए प्रतिनिधि के इंतजार में है, जबकि राजनीतिक दल शह-मात के खेल में उलझे हुए हैं।

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