मुंबई: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के बीच मुंबई में पेड़ गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों के भीतर शहर में 523 पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद एक बार फिर मुंबई में बड़े पैमाने पर हो रहे सड़कों के कंक्रीटीकरण, पेड़ों की देखरेख और छंटाई (प्रूनिंग) की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
तेज बारिश और तेज हवाओं ने बढ़ाया खतरा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, 5 जुलाई की सुबह से 6 जुलाई की सुबह तक शहर और उपनगरों में कुल 523 पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं। नगर निगम का कहना है कि मानसून के दौरान 72 से 79 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खराब मौसम ही इन घटनाओं की वजह नहीं है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर पेड़ों की जड़ों के आसपास बड़े पैमाने पर कंक्रीट बिछा देने से उनकी प्राकृतिक पकड़ कमजोर हो रही है, जिससे तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ आसानी से गिर जाते हैं।
कंक्रीट सड़कें बनीं बहस का केंद्र
मुंबई में चल रहे सड़क कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि जब पेड़ों के चारों ओर पूरी तरह कंक्रीट डाल दिया जाता है, तो वर्षा का पानी जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। इससे जड़ों का प्राकृतिक विकास प्रभावित होता है और पेड़ों की मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है।
विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि शहर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों और भूमिगत परियोजनाओं के कारण कई पेड़ों की जड़ें पहले से ही प्रभावित हो चुकी हैं, जिससे वे मौसम की मार झेलने में कमजोर पड़ रहे हैं।
गलत प्रूनिंग पर भी उठे सवाल
पेड़ों की छंटाई को लेकर भी विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई बार वैज्ञानिक तरीके से छंटाई नहीं होने के कारण पेड़ों का संतुलन बिगड़ जाता है। एक तरफ अधिक शाखाएं काट देने या समय से पहले प्रूनिंग करने से पेड़ों की संरचना कमजोर हो सकती है, जिससे तेज हवाओं में उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
मानसून में बढ़ी पेड़ गिरने की घटनाएं
आंकड़ों के अनुसार, मानसून शुरू होने के बाद से मुंबई में पेड़ गिरने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। शुरुआती दो सप्ताह में ही 800 से अधिक पेड़ गिर चुके हैं, जिससे शहर में यातायात, बिजली आपूर्ति और जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़कें घंटों तक बंद रहीं और आपातकालीन सेवाओं को भी राहत कार्य में जुटना पड़ा।
विशेषज्ञों ने सुझाए समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए केवल मानसून से पहले पेड़ों की छंटाई करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके बजाय पेड़ों की नियमित स्वास्थ्य जांच, जड़ों के आसपास पर्याप्त खुली मिट्टी छोड़ना, वैज्ञानिक पद्धति से प्रूनिंग करना और निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसके साथ ही शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों के साथ शहर की हरियाली और लोगों की सुरक्षा दोनों सुरक्षित रह सकें।
मुंबई में लगातार बढ़ रही पेड़ गिरने की घटनाओं ने ये साफ कर दिया है कि केवल प्राकृतिक परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के साथ-साथ शहरी नियोजन, सड़क निर्माण और पेड़ों के रखरखाव की नीतियों की भी गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

























