किस्त पर स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर है। अगर किसी ग्राहक की EMI समय पर जमा नहीं होती है, तो तय शर्तों के तहत लोन देने वाली संस्था उसके डिवाइस पर कुछ पाबंदियां लगा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस व्यवस्था से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।
नए प्रावधानों के मुताबिक, डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया कम से कम 30 दिन की EMI देरी के बाद शुरू की जा सकती है। वहीं, 60 दिन से ज्यादा की देरी होने पर लोन एग्रीमेंट के तहत व्यापक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पहले प्रस्तावित व्यवस्था में यह अवधि 90 दिन थी।
30 दिन की देरी के बाद शुरू हो सकती है कार्रवाई
RBI के संशोधित निर्देशों के अनुसार, EMI में कम से कम 30 दिन की देरी होने से पहले लेंडर डिवाइस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता। इसके अलावा, ग्राहक को डिफॉल्ट के संबंध में औपचारिक नोटिस देना जरूरी होगा।
अगर भुगतान में 30 से 60 दिन की देरी होती है, तो लेंडर डिवाइस को धीरे-धीरे प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हालांकि, इस अवधि में ग्राहक की आउटगोइंग कॉल को ब्लॉक नहीं किया जा सकता।
60 दिन से ज्यादा की देरी होने पर अनुबंध में तय व्यापक प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
इमरजेंसी कॉल और जरूरी सुविधाएं रहेंगी चालू
RBI ने ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी सुविधाओं को प्रतिबंध से बाहर रखा है। डिवाइस लॉक होने की स्थिति में भी इनकमिंग कॉल, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर को ब्लॉक नहीं किया जा सकता।
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि डिवाइस पर लगाई गई पाबंदियां ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे ग्राहक की नौकरी या रोजगार से जुड़ी जरूरी गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हों।
EMI भरते ही एक घंटे में अनलॉक करना होगा डिवाइस
अगर ग्राहक बकाया EMI का भुगतान कर देता है, तो लेंडर या उसके सर्विस प्रोवाइडर को डिवाइस एक घंटे के भीतर अनलॉक करना होगा।
यदि भुगतान के बाद डिवाइस अनलॉक करने में देरी होती है, तो लेंडर को ₹250 प्रति घंटे की दर से मुआवजा देना होगा। हालांकि, कुल मुआवजा संबंधित लोन की रकम से अधिक नहीं हो सकता।
ग्राहक का निजी डेटा नहीं देख सकेंगे लेंडर
डिवाइस लॉक करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर को लेकर भी RBI ने शर्तें तय की हैं। लेंडर और उनके सर्विस प्रोवाइडर्स को डिवाइस लॉकिंग सॉफ्टवेयर के लिए संबंधित ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म से सर्टिफिकेशन लेना होगा।
इसके साथ ही लेंडर डिफॉल्ट करने वाले ग्राहक के फोन में मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच नहीं बना सकते। इसमें कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग, फोटो, लोकेशन हिस्ट्री और SMS जैसी व्यक्तिगत जानकारी शामिल है।
रिकवरी एजेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव
RBI ने रिकवरी एजेंट से संबंधित नियमों में भी कुछ बदलाव किए हैं। पहले बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं को अपनी वेबसाइट पर अलग-अलग रिकवरी एजेंटों के नाम और उनकी व्यक्तिगत जानकारी प्रकाशित करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी।
इंडस्ट्री की ओर से इस व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक दिक्कतें बताई गई थीं। खास तौर पर रिकवरी स्टाफ के बार-बार बदलने के कारण रिकॉर्ड को लगातार अपडेट करना मुश्किल बताया गया।
फीडबैक को ध्यान में रखते हुए RBI ने अलग-अलग रिकवरी एजेंटों के नाम और निजी जानकारी सार्वजनिक करने की शर्त में ढील दी है।
ग्राहकों के लिए क्या समझना जरूरी है?
इस व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि एक EMI लेट होते ही फोन तुरंत लॉक हो जाएगा। डिवाइस पर कार्रवाई के लिए तय समय-सीमा, नोटिस और अनुबंध की शर्तों का पालन करना होगा। साथ ही जरूरी संचार और इमरजेंसी सुविधाएं चालू रखना अनिवार्य है।
इसलिए EMI पर फोन, टैबलेट या लैपटॉप खरीदने वाले ग्राहकों को अपने लोन एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और भुगतान में देरी होने पर लेंडर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
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