नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए एक ऐसा खेल सुर्खियों में आ गया है, जिसके बारे में देश में अभी भी बहुत कम लोग जानते हैं। यह खेल है टेकबॉल (Teqball)। आइची-नागोया एशियन गेम्स में पहली बार टेकबॉल को शामिल किया गया है और भारतीय खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा के पास इस खेल में भारत को पदक दिलाने के दो मौके हैं।
क्या है टेकबॉल?
टेकबॉल को आसान भाषा में फुटबॉल और टेबल टेनिस का मिश्रण कहा जा सकता है। इसमें खिलाड़ी एक खास तरह की घुमावदार यानी कर्व्ड टेबल के दोनों तरफ खेलते हैं। टेबल के बीच में नेट लगा होता है और खिलाड़ी फुटबॉल जैसी गेंद का इस्तेमाल करते हैं।
इस खेल में रैकेट का इस्तेमाल नहीं होता और गेंद को हाथ से छूना भी मना है। खिलाड़ी पैर, घुटने, जांघ, छाती, कंधे और सिर समेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों से गेंद को नियंत्रित करते हैं।
कैसे खेला जाता है टेकबॉल?
टेकबॉल सिंगल्स और डबल्स दोनों फॉर्मेट में खेला जाता है। एक खिलाड़ी गेंद को विपक्षी की ओर भेजने से पहले अधिकतम तीन टच कर सकता है। लगातार एक ही बॉडी पार्ट से गेंद को छूने की अनुमति नहीं होती।
मैच आमतौर पर बेस्ट ऑफ थ्री सेट के आधार पर खेले जाते हैं और एक सेट जीतने के लिए 12 अंक हासिल करने होते हैं। डबल्स में खिलाड़ियों के बीच तालमेल और सही टाइमिंग भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
टेकबॉल की शुरुआत कहां हुई?
टेकबॉल की शुरुआत 2012 में बुडापेस्ट, हंगरी में हुई थी। पूर्व फुटबॉलर गैबोर बोर्सानी ने इस खेल की अवधारणा विकसित की थी। बाद में घुमावदार टेबल और खेल के नियमों को विकसित कर इसे एक व्यवस्थित खेल का रूप दिया गया।
समय के साथ कई अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ियों और क्लबों के बीच भी टेकबॉल लोकप्रिय हुआ। सोशल मीडिया के जरिए इस खेल को दुनिया के कई हिस्सों में पहचान मिली।
क्विम्सी डिसूजा पर भारत की नजर
भारत की क्विम्सी जोआकिम डिसूजा ने एशियन गेम्स के टेकबॉल अभियान में शानदार शुरुआत की। उन्होंने महिला सिंगल्स में जापान की यूइना सकामोटो को 2-1 से हराया और इसके बाद कंबोडिया की कोएमियन डीवाई को 2-0 से मात देकर ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया।
सेमीफाइनल में उनका सामना इंडोनेशिया की सुमाया से हुआ। क्विम्सी ने पहला सेट 12-7 से जीता, लेकिन सुमाया ने वापसी करते हुए अगले दोनों सेट 12-9 और 12-7 से जीत लिए। इस हार के बाद क्विम्सी अब महिला सिंगल्स के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उतरेंगी।
मिक्स्ड डबल्स में भी पदक का मौका
क्विम्सी के पास सिर्फ महिला सिंगल्स में ही नहीं, बल्कि मिक्स्ड डबल्स में भी पदक जीतने का मौका है। वह मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ भारतीय जोड़ी का हिस्सा हैं।
भारतीय जोड़ी को क्वार्टर फाइनल में वियतनाम से हार मिली थी, लेकिन रेपेचेज में जीत के बाद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जगह बनाई। इस तरह क्विम्सी के पास रविवार को भारत के लिए टेकबॉल में दो पदक जीतने के मौके होंगे।
भारत के लिए क्यों खास है टेकबॉल?
टेकबॉल का एशियन गेम्स में यह पहला संस्करण है। इसलिए इस खेल में मिलने वाला कोई भी पदक भारत के लिए इस प्रतियोगिता में ऐतिहासिक उपलब्धि होगा।
भारत में भी टेकबॉल धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 180 पंजीकृत टेकबॉल खिलाड़ी हैं और इस खेल को भारत में 2019 के आसपास संगठित रूप से बढ़ावा मिलना शुरू हुआ था।
अब निगाहें क्विम्सी डिसूजा और भारतीय मिक्स्ड डबल्स जोड़ी पर हैं। अगर वे ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले जीतते हैं, तो एशियन गेम्स में टेकबॉल के डेब्यू संस्करण में भारत का नाम पदक विजेताओं में दर्ज हो जाएगा।






























