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2028 से हर नई गाड़ी में होगा V2V सिस्टम! आसपास की गाड़ियों का मिलेगा रियल-टाइम डेटा

V2V
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सड़क हादसों को कम करने और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ा तकनीकी बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Vehicle-to-Vehicle यानी V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2028 या उसके बाद बनने वाले L, M और N कैटेगरी के नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम लगाना जरूरी होगा। इसमें दोपहिया और तिपहिया वाहनों के साथ-साथ पैसेंजर और गुड्स व्हीकल भी शामिल होंगे। हालांकि, ये अभी ड्राफ्ट प्रस्ताव है और अंतिम नियम अधिसूचित होने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

2027 से शुरू होगी तैयारी

सरकार ने इस व्यवस्था को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

ड्राफ्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से बनाए जाने वाले L, M और N कैटेगरी के ऐसे वाहन, जिनमें पहले से V2V सिस्टम लगाया गया है, उन्हें AIS-230 मानकों का पालन करना होगा। वहीं 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले इन कैटेगरी के सभी नए वाहनों में V2V सिस्टम लगाना प्रस्तावित है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहन निर्माताओं और अन्य संबंधित कंपनियों को नई तकनीक के लिए जरूरी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग व्यवस्था तैयार करने का पर्याप्त समय देना है।

क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?

V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए आसपास मौजूद V2V-सक्षम वाहन आपस में महत्वपूर्ण ड्राइविंग जानकारी साझा कर सकते हैं।

इसमें वाहन की लोकेशन, स्पीड, दिशा, गति में बदलाव और अचानक ब्रेक लगाने जैसी जानकारी रियल-टाइम में दूसरे वाहनों तक पहुंच सकती है।

इस तकनीक की खासियत ये है कि वाहनों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान के लिए हर स्थिति में मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होता। इससे किसी वाहन को आसपास मौजूद दूसरे वाहन से संभावित खतरे की जानकारी उस समय भी मिल सकती है, जब वो वाहन ड्राइवर को सीधे दिखाई नहीं दे रहा हो।

कैसे रोका जा सकता है हादसा?

मान लीजिए किसी वाहन के आगे चल रही कार ने अचानक जोर से ब्रेक लगा दिया। सामान्य स्थिति में पीछे चल रहे ड्राइवर को खतरे का पता तब लग सकता है, जब उसे सामने वाली गाड़ी दिखाई दे।

V2V सिस्टम में आगे वाली गाड़ी की अचानक ब्रेकिंग की जानकारी आसपास के V2V-सक्षम वाहनों तक पहुंच सकती है। पीछे वाली गाड़ी का सिस्टम इस जानकारी को अपनी स्पीड, दिशा और लोकेशन से मिलाकर संभावित टक्कर का आकलन कर सकता है।

इसके बाद ड्राइवर को समय रहते ऑडियो, विजुअल या अन्य प्रकार का अलर्ट दिया जा सकता है।

यही तकनीक संभावित रूप से इन परिस्थितियों में भी मददगार हो सकती है –

  • अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति
  • आगे टक्कर का खतरा
  • असुरक्षित लेन बदलना
  • गलत दिशा से आने वाला वाहन
  • किसी वाहन का तेजी से पास आना
  • आपातकालीन वाहनों की मौजूदगी

इससे ड्राइवर को खतरे पर प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।

ब्लाइंड कर्व और चौराहों पर ज्यादा उपयोगी

V2V तकनीक का एक बड़ा फायदा उन जगहों पर हो सकता है जहां ड्राइवर को दूसरे वाहन दिखाई नहीं देते।

उदाहरण के लिए किसी ब्लाइंड कर्व, चौराहे या सड़क के ऐसे हिस्से पर जहां सामने से आने वाला वाहन किसी अवरोध के कारण नजर नहीं आ रहा है, V2V सिस्टम संभावित खतरे की जानकारी पहले उपलब्ध करा सकता है।

इस तरह ये तकनीक केवल ड्राइवर की आंखों और वाहन के कैमरे या सेंसर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के दूसरे कनेक्टेड वाहनों से मिलने वाली जानकारी का भी इस्तेमाल कर सकती है।

ADAS को भी मिल सकती है मदद

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक V2V कम्युनिकेशन सिस्टम Advanced Driver Assistance Systems यानी ADAS को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकता है।

ADAS में कई ऐसी सुरक्षा सुविधाएं शामिल होती हैं जो ड्राइवर को संभावित खतरे के बारे में चेतावनी देती हैं। V2V से मिलने वाली अतिरिक्त जानकारी इन सिस्टम्स को सड़क पर मौजूद परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है।

हालांकि, V2V तकनीक का मतलब ये नहीं है कि वाहन अपने आप हर दुर्घटना को रोक देगा। इसका मुख्य उद्देश्य ड्राइवर और वाहन के सुरक्षा सिस्टम को संभावित खतरे की पहले जानकारी उपलब्ध कराना है।

V2V के बाद V2I की भी तैयारी

सरकार भविष्य में केवल वाहनों को आपस में जोड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसके अगले चरण में Vehicle-to-Infrastructure यानी V2I कम्युनिकेशन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

V2I में वाहन सड़क पर मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए ट्रैफिक सिग्नल, सड़क किनारे लगे उपकरण, पुल, फ्लाईओवर और बैरिकेड वाले क्षेत्रों जैसी जगहों पर सेंसर या कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए जा सकते हैं।

इससे वाहन को आगे सड़क पर मौजूद किसी खतरे या ट्रैफिक स्थिति के बारे में पहले से जानकारी मिल सकती है।

कौन-कौन से वाहन होंगे शामिल?

ड्राफ्ट प्रस्ताव में तीन प्रमुख वाहन कैटेगरी शामिल हैं –

L कैटेगरी: दोपहिया और तिपहिया सहित संबंधित मोटर वाहन

M कैटेगरी: यात्रियों को ले जाने वाले वाहन, जैसे कार और बस

N कैटेगरी: सामान ढोने वाले वाहन, जैसे ट्रक और अन्य गुड्स व्हीकल

इन कैटेगरी के 1 अक्टूबर 2028 या उसके बाद निर्मित नए वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है।

कौन सा वायरलेस फ्रीक्वेंसी बैंड इस्तेमाल होगा?

V2V और अन्य Intelligent Transport System applications के लिए भारत में 5.875 GHz से 5.925 GHz का फ्रीक्वेंसी बैंड निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य वाहनों और संबंधित परिवहन प्रणालियों के बीच वायरलेस कम्युनिकेशन के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना है।

क्या पुरानी गाड़ियों में भी लगाना होगा V2V?

फिलहाल उपलब्ध ड्राफ्ट प्रस्ताव का मुख्य फोकस नए निर्मित वाहनों पर है। 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले संबंधित नए वाहनों में V2V सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।

वहीं, जो वाहन 1 अक्टूबर 2027 से पहले ही V2V सिस्टम से लैस हैं, उनके लिए 1 अक्टूबर 2027 से AIS-230 के अनुरूप मानकों का पालन करने का प्रस्ताव है।

इसलिए ये कहना सही नहीं होगा कि 2028 से सड़क पर चल रही हर पुरानी कार या बाइक में भी अनिवार्य रूप से V2V डिवाइस लगाना पड़ेगा।

क्या इससे हादसे पूरी तरह खत्म हो जाएंगे?

नहीं। V2V तकनीक सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे दुर्घटनाओं का पूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता।

सड़क दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, लापरवाही से ड्राइविंग, शराब पीकर वाहन चलाना, खराब सड़कें, मौसम और वाहन की स्थिति जैसे कई कारण होते हैं। V2V इनमें से खासतौर पर वाहनों के बीच संभावित टक्कर से जुड़े जोखिमों को पहले पहचानने और चेतावनी देने में मदद कर सकता है।

अभी अंतिम नियम लागू नहीं हुआ है

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि सरकार ने अभी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें संबंधित पक्षों और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसलिए अंतिम नियम लागू होने से पहले प्रावधानों में बदलाव संभव है।

आसान भाषा में समझें

अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप में लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में नई गाड़ियां सिर्फ सड़क पर चलने वाली मशीन नहीं रहेंगी, बल्कि एक-दूसरे से सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा करने वाले कनेक्टेड वाहन बनेंगी।

2027: V2V से लैस वाहनों के लिए AIS-230 अनुपालन का प्रस्ताव

2028: नए L, M और N कैटेगरी के वाहनों में V2V सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव

भविष्य: V2I जैसी तकनीकों के जरिए वाहनों और सड़क के इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच कम्युनिकेशन बढ़ाने की दिशा

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा ये हो सकता है कि ड्राइवर को किसी खतरे के सामने आने से पहले ही चेतावनी मिल जाए, जिससे दुर्घटना से बचने के लिए प्रतिक्रिया देने का अतिरिक्त समय मिल सके।

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