Maratha Kunbi Certificate: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सरकार ने गांव स्तर पर समितियां बनाने की घोषणा की, जो मराठा समाज के पात्र लोगों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करेंगी। यह फैसला सामाजिक न्याय विभाग की ओर से जारी एक सरकारी आदेश के तहत लिया गया है।
इस आदेश के मुताबिक, समितियां पुराने जमीन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करेंगी, खासकर 1918 के हैदराबाद गजट में दर्ज दस्तावेजों के आधार पर। इस गजट में मराठा समाज को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना गया था, जिसके कारण उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
हर समिति में एक ग्राम सेवक, एक तलाठी और एक सहायक कृषि अधिकारी शामिल होंगे। ये लोग मराठा आवेदकों द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपेंगे, जो कुणबी प्रमाणपत्र जारी करेगा।
आदेश में साफ कहा गया है कि जिन मराठा लोगों या उनके पूर्वजों के पास 21 नवंबर 1961 से पहले की जमीन के रिकॉर्ड, जैसे पुराने जमीन के अंश या राजस्व रजिस्टर हैं, उन्हें प्रमाणपत्र के लिए पात्र माना जाएगा। समिति इन रिकॉर्ड के आधार पर स्थानीय जांच करेगी और आवेदकों को प्रमाणित करेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका मकसद उन सभी मराठा लोगों को कुणबी प्रमाणपत्र देना है, जो अपने परिवार के रिकॉर्ड के जरिए अपनी पात्रता साबित कर सकते हैं। इससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने इस फैसले का स्वागत किया है। हाल ही में उन्होंने पांच दिन की भूख हड़ताल खत्म की थी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हैदराबाद गजट को लागू करने की उनकी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने इसे मराठा समाज के लिए ऐतिहासिक पल बताया और कहा कि यह फैसला मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों के मराठा परिवारों को फायदा पहुंचाएगा।
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