PIL Challenges Kunbi GR in High Court: मुंबई में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर से हलचल मच गई है। महाराष्ट्र सरकार के 2 सितंबर 2025 को जारी सरकारी आदेश (जीआर) को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस आदेश में मराठवाडा के मराठों को कुणबी जाति का दर्जा देने के लिए हैदराबाद गजट को लागू करने की बात कही गई है। यह मामला ओबीसी समुदाय की आरक्षण हिस्सेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है।
पिछले साल ओबीसी वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष मंगेश ससाने ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें 2004 से अब तक जारी पांच सरकारी आदेशों को चुनौती दी गई थी, जो मराठों को कुणबी प्रमाणपत्र लेने की इजाजत देते हैं। अब ससाने ने अपनी याचिका में बदलाव कर 2 सितंबर के नए आदेश को भी शामिल किया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखद की बेंच के सामने इस मामले का जिक्र हुआ। कोर्ट ने ससाने को औपचारिक रूप से याचिका में संशोधन के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा। इस मामले की सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
ससाने का कहना है कि मराठों को कुणबी प्रमाणपत्र देने का फैसला ओबीसी समुदाय के आरक्षण को कमजोर कर रहा है। उनकी याचिका में दावा किया गया है कि सरकार का यह कदम ओबीसी के लिए तय कोटे में सेंध लगाता है। उन्होंने जस्टिस (रिटायर्ड) संदीप शिंदे समिति के गठन पर भी सवाल उठाए, जो मराठों को कुणबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए बनाई गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
पहले भी 10 अक्टूबर 2024 को हाई कोर्ट ने ससाने की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में 26 जनवरी 2024 को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई थी। इस नोटिफिकेशन में महाराष्ट्र के जाति प्रमाणपत्र नियमों में बदलाव किया गया था, जिससे मराठों के लिए कुणबी प्रमाणपत्र लेना आसान हो गया। ससाने का कहना है कि पहले कुणबी दर्जा पाने की प्रक्रिया सख्त थी, लेकिन बार-बार होने वाले आंदोलनों के बाद सरकार ने नियमों को ढीला कर दिया। उनका आरोप है कि यह मराठों को ओबीसी श्रेणी में “बैकडोर एंट्री” देने जैसा है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें मराठों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने वाले सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) अधिनियम, 2018 को रद्द कर दिया गया था। ससाने का कहना है कि अब सरकार मराठों को ओबीसी में शामिल कर उनके कोटे को नुकसान पहुंचा रही है।
यह विवाद मराठा कार्यकर्ता मनोज जारांगे के आंदोलन से और गर्म हुआ है। जारांगे ने 29 अगस्त को मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी, जिससे शहर में पांच दिनों तक हंगामा रहा। 2 सितंबर को सरकार ने उनकी मांगें मानते हुए नया जीआर जारी किया, जिसके बाद उन्होंने अपना आंदोलन खत्म कर दिया।























